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कांग्रेस का आरोप: हिमाचल और गुजरात में चुनाव तारीखों का एलान एक साथ होना था

कांग्रेस के महासचिव व गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत का कहना है कि भाजपा ने चुनाव आयोग पर दबाव डाला है।

Author जयपुर | October 30, 2017 00:44 am

कांग्रेस के महासचिव व गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत का कहना है कि भाजपा ने चुनाव आयोग पर दबाव डाला है। हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव तारीखों का एलान एक साथ होना था। भाजपा नेतृत्व के आयोग पर दबाव डालने की वजह से तारीखों को आगे पीछे घोषित किया गया। गहलोत ने दावा किया कि गुजरात चुनाव में जनता भाजपा को सबक सिखाएगी। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को जोधपुर में कहा कि भाजपा गुजरात में सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर रही है। इसके बावजूद गुजरात की जनता भाजपा के कुशासन से छुटकारा चाहती है। कांग्रेस ने संगठन क्षमता में माहिर दिग्गज नेता गहलोत को चुनाव से पहले ही गुजरात का प्रभारी बनाया था। इस दौरान गहलोत ने गुजरात में पूरी कांग्रेस को एकजुट किया।

कांग्रेस के नेताओं को भाजपा से मुकाबले के लिए गहलोत ने गुजरात में लंबा समय संगठन के लिए निकाला। इसका अच्छा नतीजा भी सामने आया है। गुजरात में चुनाव से पहले ही कांग्रेस अब भाजपा को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ गई है। राजस्थान के करीब डेढ़ सौ कांग्रेस नेताओं को गहलोत ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में पर्यवेक्षक बनाया है। गहलोत के भरोसेमंद इन नेताओं ने गुजरात में मोर्चा भी संभाल लिया है। कांग्रेस आलाकमान ने भी गहलोत की इस मुहिम का पूरा साथ दिया और पर्यवेक्षकों को विशेष निर्देश देते हुए स्थानीय नेताओं को जोड़ कर भाजपा से मुकाबले की जिम्मेदारी सौंपी है। इन नेताओं के अनुसार गुजरात की जनता अब बदलाव चाहती है।

राजस्थान से गुजरात गए कांग्रेस के नेताओं के अनुसार पार्टी का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं खासकर उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लगातार दौरे से भाजपा में बैचेनी का माहौल है। इस कारण ही प्रधानमंत्री को अपने गृह राज्य में ज्यादा समय प्रचार के लिए देना पड़ रहा है। गुजरात के तीन युवा नेताओं अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल का रुझान कांग्रेस की तरफ बढ़ा है। ठाकोर को पिछड़े वर्ग से, जिग्नेश से दलित समुदाय और हार्दिक पटेल के कारण पाटीदार समाज के युवा कांग्रेस की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। गुजरात के कांग्रेस प्रभारी गहलोत ने पूरी तरह से भाजपा के प्रति आक्रामक रवैया अपनाया। इससे कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल में बढ़ोतरी हुई। पर्यवेक्षक बन कर गुजरात गए राज्य के नेताओं का मानना है कि चुनाव में बेहतर नतीजे आएंगे और कांग्रेस का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ रहा है।

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