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आशीष दुबे की रिपोर्टः हरियाली के साथ कदमताल कर ही बढ़ेगी मेट्रो की चाल

नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना को हरित मेट्रो का स्वरूप देना होगा। जिसके दूरगामी फायदे आम आदमी को होंगे।

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना को हरित मेट्रो का स्वरूप देना होगा। जिसके दूरगामी फायदे आम आदमी को होंगे। मेट्रो परियोजनाओं में पर्यावरणीय मंजूरी की अनिवार्यता की वजह से यह संभव हुआ है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक बनाई जा रही मेट्रो की पर्यावरणीय मंजूरी के लिए एसईआइएए ने कुछ शर्तें लगाई हैं। जिसमें वर्षा जल संचयन के लिए 576 पिट (गड्ढे) और 17485 नए पेड़ लगाने होंगे। पार्किंग को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलनोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना को हरित मेट्रो का स्वरूप देना होगा। जिसके दूरगामी फायदे आम आदमी को होंगे।ने जा रहा है। जिसमें मेट्रो स्टेशनों पर रोड साइड पार्किंग पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। एनएमआरसी को सभी 21 स्टेशनों पर पार्किंग प्लान देना होगा। अभी तक केवल 7 स्टेशनों पर ही पार्किंग की मानकों के अनुरूप व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों के आसपास मेट्रो को सभी चुनिंदा जगहों पर साउंड बैरियर लगाने होंगे।

जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) ने अभी तक केवल चुनिंदा और पॉश इलाकों में ही साउंड बैरियर लगाए हैं। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआइएए) ने नोएडा ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी जारी करने से पहले संदर्भ की अवधि में ये शर्तें लगाई हैं। मेट्रो परियोजना में पर्यावरणीय स्वीकृति को जरूरी बताते हुए नोएडा के पर्यावरणविद् विक्रांत तोगड़ ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी के आदेश के बाद नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन (एनएमआरसी) ने एसईआइएए में पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जुलाई, 2016 में आवेदन किया था। विक्रांत तोगड़ ने बताया कि नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने वाली मेट्रो परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने से पहले कई दीर्घकालिक सुधार करने होंगे।

इसमें सबसे अहम सभी स्टेशनों पर पार्किंग की व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और 17485 पेड़ों को लगाकर रख-रखाव करना है। 29 किलोमीटर लंबी मेट्रो परियोजना में कुल 21 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें से केवल 7 में ही व्यवस्थित पार्किंग का प्रबंध किया गया था। जबकि अन्य जगहों पर सड़कों के किनारे ही पार्किंग होनी थी। सड़कों के किनारे पार्किंग से धूल, मिट्टी उड़कर पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाती है। इसी तरह मेट्रो परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रपट (डीपीआर) में पेड़ लगाने का प्रावधान ही नहीं था। जबकि अब 17485 पेड़ भी एनएमआरसी को लगाने पड़ेंगे। ध्वनि अवरोध (साउंड बैरियर) भी उन सभी जगहों पर लगाने होंगे, जिसके आसपास अस्पताल, स्कूल या रिहायशी बस्ती होगी। बता दें कि उप्र में सत्ताधारी सपा सरकार ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना को सबसे ज्यादा प्राथमिकता में रखा है। सरकार 2017 में होने वाले चुनावों से पहले मेट्रो परियोजना को शुरू कराना चाह रही है। करीब 5500 करोड़ रुपए की लागत से बन रही मेट्रो परियोजना का खर्च नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उठा रही है।

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