एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपने पहले उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया है। ओवैसी ने बहराइच के मटेरा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार बनाया है। मटेरा विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की विधायक मारिया शाह हैं। मारिया शाह पूर्व मंत्री यासिर शाह की पत्नी हैं।
असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी। उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकारों के मुताबिक, ओवैसी के चुनाव लड़ने से सबसे ज्यादा टेंशन समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हो सकती है।
ओवैसी ने रविवार को मटेरा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनावी तैयारी में जुटने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने गठबंधन से परहेज नहीं किया लेकिन इसमें बराबरी और सम्मान की भी बात की। ओवैसी ने कहा कि अगर कोई बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन करना चाहता है तो उनकी पार्टी तैयार है।
मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी की वकालत
ओवैसी पिछले काफी सालों से मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी और भागीदारी का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि तमाम सेकुलर पार्टियों मुसलमान के वोट ले लेती हैं लेकिन उन्हें सही राजनीतिक हक और हिस्सेदारी नहीं देतीं।
उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव का वक्त आगे भी खिसक सकता है।
पीडीए फार्मूले में लगेगी सेंध?
ओवैसी की सक्रियता अखिलेश यादव के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है क्योंकि अखिलेश यादव के पीडीए फार्मूले में ‘ए’ का मतलब अल्पसंख्यक है। उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक मतदाताओं में 95% से ज्यादा मुस्लिम समुदाय के मतदाता हैं। पिछले कुछ चुनावों में उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता मजबूती से सपा के साथ खड़ा रहा है।
अखिलेश यादव और सपा को चिंता है कि ओवैसी अगर बिहार की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़े तो वह कुछ सीटों पर पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिहार में एआईएमआईएम ने सीमांचल में चुनाव लड़ा था और इससे वहां आरजेडी को नुकसान हुआ था। चुनावी जनसभाओं में ओवैसी तेजस्वी यादव पर हमलावर रहे थे। एआईएमआईएम ने बिहार में पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी।
उत्तर प्रदेश में लगभग 20% आबादी वाला मुस्लिम समुदाय लगभग 50 सीटों पर जीत-हार तय करने की क्षमता रखता है। राजनीतिक विशेषकों के मुताबिक, अगर असदुद्दीन ओवैसी ने 20 से 30 सीटों पर भी समाजवादी पार्टी का गणित बिगाड़ दिया तो इससे उत्तर प्रदेश में भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों को फायदा हो सकता है।
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