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ऑक्सीजन बिना मरे 26 कोरोना मरीज: छह दिन पहले डॉक्टर्स ने किया था अलर्ट, फिर भी न चेता अस्पताल

GMCH कोविड वॉर्ड में पिछले एक साल से काम कर रहे गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के अध्यक्ष प्रतीक सावंत ने कहा कि 26 मरीजों की मौत की रात वे ऑक्सीजन की कमी से पूरी तरह से असहाय महसूस कर रहे थे।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पणजी | Updated: May 13, 2021 9:39 AM
गोवा के सीएम प्रमोद सावंत बुधवार को GMCH का दौरा करने पहुंचे। (एक्सप्रेस फोटो)

गोवा में मंगलवार तड़के ऑक्सीजन की कथित कमी से 26 मरीजों की मौत पर बवाल मच गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने इस घटना और मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए हाईकोर्ट से जांच की बात कही है। दरअसल, राणे ने जोर दिया है कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी कोई मुद्दा नहीं है। हालांकि, गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) के डॉक्टरों और यहां जान गंवाने वाले कोरोना मरीजों के परिजनों तक का कहना है कि उन्होंने अस्पताल में कुछ दिन पहले ही ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठा दिया था।

बताया गया है कि ऑक्सीजन की कमी को लेकर हादसे से छह दिन पहले ही गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने GMCH के डीन को चिट्ठी लिखी थी और रात में संकट की बात बताई थी। बुधवार को गोवा में हाईकोर्ट ऑफ बॉम्बे के सामने इस मामले में दायर पीआईएल पर सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ। डीन एसएम बांदेकर ने भी माना कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई की कुछ दिक्कत थी और इसी वजह से मौतें हुईं। हाईकोर्ट ने इसके बाद कहा कि हमारे सामने जो भी सबूत रखे गए हैं, वे स्थापित करते हैं कि मरीज कष्ट से गुजर रहे थे और कुछ मामलों में तो ऑक्सीजन की कमी से मर भी रहे थे।

गोवा के सलिगांव की रहने वाले एश्ली डेलानी के मुताबिक, जीएमसीएच में मंगलवार को जान गंवाने वाले 26 मरीजों में उनके पूर्व टीचर अवितो भी शामिल थे। डेलानी के मुताबिक, वे 21 अप्रैल से हर दिन अस्पताल जा रही थे और अस्पताल प्रशासन से रात में ऑक्सीजन की कमी पैदा हो जाने के मुद्दे को भी कई दिनों तक उठा चुके थे। डेलानी का कहना है कि उनके ससुर भी इसी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन वे उस दिन बच गए, क्योंकि उनके पास कोरोना से जान गंवा चुके एक मरीज का सिलेंडर था। उन्होंने बताया कि मरीजों के साथ आए कई और लोग इस कमी को उठाने से डर रहे थे, क्योंकि इससे मरीज पर बुरा असर पड़ सकता था। लेकिन एक दिन पूरे वॉर्ड में ऑक्सीजन की कमी पैदा हो गई और मैंने इस घटना के बारे में सोशल मीडिया पर बताना शुरू किया।

GMCH कोविड वॉर्ड में पिछले एक साल से काम कर रहे गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के अध्यक्ष प्रतीक सावंत ने कहा कि उस रात वे पूरी तरह से असहाय महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा आता है जब आपको चुनना होता है कि किसको बचा सकते हैं और किसको नहीं। यह काफी मुश्किल है, खासकर अगर ऑक्सीजन की कमी हो। सुबह तो किसी को भी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन रात में सिर्फ कुछ ही डॉक्टर होते हैं, जो 40 से 60 मरीजों पर नजर रखते हैं। अगर ऑक्सीजन प्रेशर कम होना शुरू हो जाए और सभी गंभीर हो जाएं, तो यह बड़ा मुद्दा है। हमने यह देर रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक देखा।”

5 मई को जीएमसीएच के डीन को लिखी गई चिट्ठी में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा था कि हम रोजाना आधार पर उच्चाधिकारियों के ऐसे बयान सुन रहे हैं कि ऑक्सीजन और बेड्स की कमी कोई मुद्दा नहीं है। तब मरीज ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर्स से पूछते हैं कि अगर बेड्स की कमी नहीं है, तो आखिर क्यों मरीजों को ट्रॉली, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और जमीन पर ही रखा जा रहा है। बीच रात में अगर ऑक्सीजन खत्म हो जाए और किसी मरीज की तबियत बिगड़ने से उसकी मौत हो जाए, तो उसके गुस्साए परिजनों का सामना एक जूनियर डॉक्टर को करना पड़ता है।

जीएमसीएच का दौरा करने वाले गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा था कि मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता और जीएमसीएच में कोविड- 19 वार्ड तक इसकी आपूर्ति के बीच अंतर से रोगियों को कुछ समस्याएं हुई हैं। इसके बाद ही बुधवार को पणजी के पार्षद बेंतो लोरेना ने पणजी पुलिस स्टेशन में राणे के अलावा अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए जिम्मेदार स्कूप ऑक्सीजन के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। इसमें रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की इसी चिट्ठी का जिक्र किया गया था। दोनों पर आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या का केस चलाने की मांग की गई। इसके बाद कोरोना प्रबंधन पर दक्षिण गोवा एडवोकेट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की और अस्पताल में अप्रैल से ही ऑक्सीजन संकट होने की बात कही।

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