दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर ‘फांसी घर’ मामले में छह मार्च को उपस्थिति की पुष्टि की और कार्रवाई का सीधा प्रसारण करने की मांग की।
समिति दिल्ली विधानसभा के उस पुनर्निर्मित हिस्से की जांच कर रही है, जिसे आम आदमी पार्टी के शासनकाल में ब्रिटिश काल के ‘फांसी घर’ के रूप में उद्घाटित किया गया था, जबकि भाजपा का दावा है कि यह केवल भोजन कक्ष था।
समिति के समन के अनुसार, केजरीवाल के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला की भी छह मार्च को व्यक्तिगत उपस्थिति तय की गई है।
केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि दिल्ली में प्रदूषण, टूटी सड़कें, कूड़ा ढेर और अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसी समस्याएं हैं, फिर भी उन्हें इस मुद्दे पर तलब किया गया। उन्होंने पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही के हित में सीधा प्रसारण करने की अपील की।
यह मामला तब शुरू हुआ जब अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उद्घाटन की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए थे। 2022-23 में इस ‘अस्तित्वहीन फांसी घर’ पर लगभग 1.4 करोड़ खर्च किए गए थे। समिति ने पहले जनवरी में अनुपस्थिति के लिए कार्यवाही की सिफारिश भी की थी।
क्या है विवाद?
9 अगस्त 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा परिसर के भीतर एक पुराने कक्ष का उद्घाटन यह कहकर किया था कि यह ब्रिटिश काल का ‘फांसीघर’ था, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी।
आम आदमी पार्टी ने इसे देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक बताते हुए ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित करने की बात कही थी। हालांकि शुरुआत से ही इस दावे को लेकर संदेह और विरोध की आवाज उठने लगी थीं।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि इस स्थल की सत्यता की जांच के लिए भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहासकारों तथा दिल्ली नगर निगम के अभिलेखागार से दस्तावेज मंगवाए गए।
जांच के निष्कर्षों का हवाला देते हुए गुप्ता ने दावा किया कि संबंधित स्थल फांसीघर नहीं था, न ही वहां कोई सुरंग मौजूद थी। यह एक ‘टिफिन रूम’ था, जहां रस्सियों की सहायता से खाना ऊपर-नीचे भेजा जाता था।
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अदालत से राहत मिलने के बाद आम आदमी पार्टी एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनका नेतृत्व ईमानदार है और आरोप राजनीतिक हैं। इससे केजरीवाल की विश्वसनीयता को दोबारा स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
