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बीआरटी पर चला ‘आप’ का हथौड़ा

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली की शीला सरकार की ओर से बनवाए गए विवादित बीआरटी कॉरिडोर को तोड़ने का काम मंगलवार से शुरू हो गया।

Author नई दिल्ली | January 20, 2016 2:13 AM
बीआरटी गलियारे का निर्माण केंद्र सरकार के जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 2007 में शुरू हुआ था। (दिल्ली फाइल फोटो)

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली की शीला सरकार की ओर से बनवाए गए विवादित बीआरटी कॉरिडोर को तोड़ने का काम मंगलवार से शुरू हो गया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे तोड़ने का पहला हथौड़ा चलाया। इस कॉरिडोर को तोड़ने के लिए 22 मार्च की समय-सीमा रखी गई है। इसे तोड़ने में लगभग 12 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके पूरी तरह से टूटने के बाद यहां पर पुनर्विकास का काम शुरू हो जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली में कई नए प्रोजेक्ट बनाए गए। उनमें से कई प्रोजेक्ट विवादों में आ गए और अपने तय समय पर पूरे नहीं हो पाए। उनमें से एक प्रोजेक्ट बीआरटी कॉरिडोर भी था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने विदेशों की तर्ज पर यह प्रोजेक्ट बनवाया था। इस प्रोजेक्ट को दक्षिणी दिल्ली के आंबेडकर नगर से दिल्ली गेट तक बनाया जाना था। करीब 14.5 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर निर्माण का खर्चा करीब 190 करोड़ रुपए आना था। खेलों के शुरू होने तक यह प्रोजेक्ट सिर्फ मूलचंद तक ही बन पाया था।

खेलों की समाप्ति पर जब लोगों ने इसे इस्तेमाल करना शुरू किया, तो इसे लेकर दिल्ली में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इस कॉरिडोर से वाहन निकालने में लोगों को करीब दो दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता था। कॉरिडोर से सिर्फ सार्वजनिक वाहन और एंबुलेंस इत्यादि आसानी से पार होने लगे। सबसे ज्यादा परेशानी दक्षिणी दिल्ली के लोगों को उठानी पड़ी। वाहन चालक इस कॉरिडोर में घंटों फंसे रहने लगे। दिल्ली में विपक्ष को सरकार को घेरने का एक नया मुद्दा मिल गया। विपक्षी दल भाजपा दिल्ली विधानसभा में इस लेकर लगातार हंगामा करने लगी। इस मामले में कांग्रेस के भी कई विधायक अपनी सरकार के इस प्रोजेक्ट से नाराज हो गए। उधर, उस समय की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इसे एक बेहतर प्रोजेक्ट बता रहीं थीं और उन्होंने उसी तरह के तीन और कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल में पास करवा दिया। लेकिन उन्हें उस दौरान अपनी पार्टी के कई विधायकों और नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी।

दिल्ली में इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ने लगी और इस प्रोजेक्ट का आगे का निर्माण कार्य रुक गया। दिल्ली के विधानसभा चुनावों में भी यह प्रोजेक्ट कई बार चुनावी मुद्दा बना। अब मौजूदा दिल्ली की आप सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर रिव्यू शुरू कर दिया। इस प्रोजेक्ट के दायरे में करीब पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहां के सभी विधायकों ने इस कॉरिडोर का विरोध किया। इसके बाद आप की सरकार ने इसे तोड़नें का फैसला कर लिया। यह कॉरिडोर 6.20 किलोमीटर लंबा ही बना था। भाजपा ने भी पिछले साल विधानसभा चुनावों के लिए अपने विजन दस्तावेज में कॉरिडोर को तोड़ने का वादा किया था।

सड़क टूटने पर खुशी!
* हो सकता है कि कांग्रेस नेताओं ने विदेश जाकर बीआरटी को कॉपी किया हो और दिल्ली में बिना योजना के उसे लागू कर दिया हो। बीआरटी को तोड़ने का काम केवल रात में किया जाएगा ताकि यातायात सुगम तरीके से चलता रहे।

* आज पांच स्थानीय विधायकों और उनके क्षेत्र की जनता के लिए बड़ा दिन है। लोग अकसर उनके क्षेत्रों में नई सड़कों के निर्माण का इंतजार करते हैं। यह शायद देश की पहली सड़क होगी जिसके टूटने पर लोगों को खुशी होगी।

* बीआरटी की अवधारणा गलत नहीं है। कई देशों में बीआरटी कॉरिडोर हैं और बसों के लिए अलग लेन हैं। लेकिन ऐसी परियोजनाओं को शुरू करने से पहले एक उचित प्रणाली अपनाई जाती है। अधिक बसें खरीदी जाती हैं और फिर पूरी योजना के साथ बीआरटी बनाया जाता है। (मनीष सिसोदिया, उपमुख्यमंत्री, दिल्ली)

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