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चुनावी घोषणाओं को भूल नए मुद्दे तलाशती केजरीवाल सरकार

दिल्ली की केजरीवाल सरकार सत्ता में आनें के करीब एक साल बाद समझ गई है कि चुनावों में की गईं घोषणाओं में से ज्यादातर पर अमल करना सरकार के बूते से बाहर है।

Author नई दिल्ली | January 26, 2016 7:14 PM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में जिन मुद्दों को लेकर चुनावों में उतरी आम आदमी पार्टी और उनकी सरकार दिल्ली की गद्दी संभालते ही अब पुरानी ज्यादातर घोषणाओं को एकतरफ करके राजधानीवासियों से सीधे जुड़े मुद्दों पर कदम बड़ा रही है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार सत्ता में आनें के करीब एक साल बाद समझ गई है कि चुनावों में की गईं घोषणाओं में से ज्यादातर पर अमल करना सरकार के बूते से बाहर है, सरकार को उनपर ज्यादा अमल करना होगा,जो दिल्ली के आम नागरिक से जुड़ी हैं। दिल्ली में ऑड-ईवन की सफलता के होर्डिंग्स कदम कदम पर देखे जा सकतें हैं, लेकिन जिस जनलोकपाल को लेकर केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने नया राजनीतिक संगठन बनाया और उसे अपनें प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाया,उसपर अब सबनें एक तरह से चुप्पी साध ली है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने हाल ही में कई नए मुद्दों पर अपनी सरकार का काम शुरू करतें ही कई पुरानों मुद्दों पर एक तरह से यूटर्न ले लिया है। हाल ही में सरकार ने दिल्लीवासियों की समस समय की समस्याओं को लेकर नई घोषणाएं शुरू कर दी हैं, उससे दिल्ली में विपक्षी दलों में राजनीतिक हड़कंप मच गया है। विपक्षी दल भी समझ गए हैं कि केजरीवाल और उनकी सरकार की राजनीतिक दिशा,इसी तरह रही तो, आनें वाला समय फिर से उनके लिए चुनौतियों भरा होगा। हाल ही में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में बच्चों के दाखिलों, सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवाईयां और ईलाज फ्री करनें की जो नई घोषणाएं की हैं,अगर वे अमल में आ जाती हैं, तो उससें दिल्लीवासियों के दिलों में सरकार की एक बेहतर छवि बन सकती हैं। दिल्ली में प्राईवेट स्कू लों में दाखिला करवाना एक टेढ़ी खीर रही है।

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