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अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन: सुप्रीम कोर्ट ने केन्‍द्र सरकार को नोटिस दिया, 2 दिन में जवाब देने को कहा

केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश में एक महीने से भी ज्यादा समय से चल रहे राजनीतिक उठापटक के बीच मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया और विधानसभा को निलंबित रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से पूछा कि वे बिना उचित गाइडलाइंस के इतना बड़ा लोन कैसे देते हैं।

अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्‍द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने केन्‍द्र से 29 जनवरी तक जवाब देने को कहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्‍काल सुनवाई की याचिका को स्‍वीकार कर लिया था। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में एक महीने से भी ज्यादा समय से चल रहे राजनीतिक उठापटक के बीच मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। कांग्रेस और अन्य दलों ने इस कदम की तीखी आलोचना की और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दो दिनों में गहन विचार-विमर्श के बाद मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दी और इस आधार को स्वीकार कर लिया कि राज्य में संवैधानिक संकट है।

गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पैदा हुए संवैधानिक संकट पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने 24 जनवरी को अपनी बैठक में वहां राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी। बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 356 (1) के तहत अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी दे दी। वहां राष्ट्रपति शासन मंगलवार से प्रभावी होगा और प्रदेश की विधानसभा निलंबित रहेगी। राष्ट्रपति ने कैबिनेट की सिफारिश के दो दिनों बाद इसकी मंजूरी दी। कैबिनेट ने रविवार को हुई विशेष बैठक में राज्य में केंद्रीय शासन लागू किए जाने की सिफारिश की थी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि कैबिनेट यह फैसला लेने को बाध्य थी क्योंकि वहां संवैधानिक संकट पैदा हो गया था और राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने की अवधि पूरी हो गयी थी।

प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की तीखी आलोचना करते हुए कांग्रेस, जद (एकी), भाकपा और आप ने इसे संघवाद और लोकतंत्र की हत्या करार दिया और भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर देश की सर्वोच्च अदालत को अपमानित करने का आरोप लगाया जो अभी मामले की सुनवाई कर रही है। भाजपा ने हालांकि इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इसे कई नजरिए से देखने की जरूरत है और यह संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप है। इसके साथ ही पार्टी ने कांग्रेस पर मु्द्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। अरुणाचल प्रदेश में पिछले साल 16 दिसंबर से राजनीतिक संकट है जब कांग्रेस के 21 विद्रोही विधायकों ने एक अस्थायी स्थल पर विधानसभा की बैठक में भाजपा के 11 और दो निर्दलीय विधायकों के साथ मिल कर विधानसभाध्यक्ष नबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास कर दिया था। विधानसभाध्यक्ष ने इस कदम को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। गौहाटी हाई कोर्ट ने भी इस बैठक को अमान्य करार दे दिया था।

राष्ट्रपति ने माना, राज्य में संवैधानिक संकट
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दो दिनों में गहन विचार-विमर्श के बाद मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दी और इस आधार को स्वीकार कर लिया कि राज्य में संवैधानिक संकट है। दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त वाईएस डडवाल और सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी जीएस पटनायक को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया गया है। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के बाद केंद्र ने ये नियुक्तियां कीं। सूत्रों ने बताया कि दोनों अधिकारियों को राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा का सलाहकार नियुक्त किया गया है। डडवाल दिल्ली पुलिस आयुक्त रहने के बाद 2011 में सशस्त्र सीमा बल से सेवानिवृत्त हुए थे। पटनायक 1980 बैच के आइएएस अधिकारी हैं जो दिल्ली सरकार में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे।

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