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करोलबाग अग्निकांड : लोगों ने यूं बयां किया दर्द, बताया- चीखें सुनकर टूटी थी नींद, हर फ्लोर पर पड़ी थीं जली हुई लाशें

करोलबाग स्थित अमृत पैलेस होटल में हुए अग्निकांड को 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन लोगों के मन से अब तक डर नहीं निकल पाया है। इस हादसे में बचे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उनकी नींद लोगों की चीखें सुनकर टूटी थी।

Author February 13, 2019 2:58 PM
होटल अर्पित में लगी भीषण आग फोटो सोर्स – ट्विटर/ANI

करोलबाग स्थित अमृत पैलेस होटल में हुए अग्निकांड को 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन लोगों के मन से अब तक डर नहीं निकल पाया है। इस हादसे में बचे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उनकी नींद लोगों की चीखें सुनकर टूटी थी। जब वे होटल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे तो हर फ्लोर पर जली हुई लाशें नजर आईं। अंदर का नजारा इतना ज्यादा डरावना और भयानक था कि आंखें बंद करने पर दोबारा नजर आने लगता है।

मेरे सामने चौथी मंजिल से कूदा एक शख्स : अहमदाबाद के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव दिलीप त्रिवेदी भी इसी होटल में रुके थे और अग्निकांड में बाल-बाल बचे। वे बताते हैं, ‘‘मैं लोगों के चीखने और रोने की आवाज सुनकर जागा था। मेरा रूम फर्स्ट फ्लोर पर था, जिसमें धुआं घुसने लगा था। बाहर कॉरिडोर में मौजूद लोग गेट की तरफ भाग रहे थे। उस वक्त भगदड़ जैसा माहौल था। जैसे ही हम बाहर निकले, एक व्यक्ति ने अपनी जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से छलांग लगा दी।’’

पिता का नहीं चला पता : दिल्ली के राजेंद्र नगर में रहने हिमांशु बताते हैं, ‘‘मंगलवार सुबह करीब 8 बजे मैं अपने कॉलेज जा रहा था, जब मुझे होटल में आग लगने का पता चला। मेरे पिता लाल चंद अर्पित पैलेस होटल के किचन में सुपरवाइजर थे। जब मैं होटल पहुंचा तो बहुत भीड़ लगी हुई थी। फायर फाइटर्स और पुलिस वाले बिल्डिंग के अंदर से शव बाहर निकाल रहे थे। मैंने तुरंत अपने घरवालों को मामले की जानकारी दी तो वे भी करोलबाग आ गए, लेकिन पापा का पता नहीं चला।

2 शव की नहीं हुई पहचान : हिमांशु के मुताबिक, ‘‘होटल में नहीं मिलने के बाद मैंने अपने पिता की तलाश अस्पतालों में शुरू कर दी। सबसे पहले मैं राम मनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग अस्पताल गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद एम्स, सफदरजंग के भी चक्कर काटे, फिर भी कुछ पता नहीं चला। अधिकारियों का कहना है कि मेरे पिता के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है।’’ पुलिस का कहना है कि 2 शव की पहचान अब तक नहीं हुई है। उनमें से एक लाल चंद हो सकते हैं।

बिजली गुल होने से भटक गए लोग :  डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर सुनील चौधरी बताते हैं, ‘‘आग लगने के बाद होटल में बिजली गुल हो गई थी। हर कोई किसी भी तरह होटल से बाहर निकलना चाहता था, जिससे भगदड़ जैसा माहौल था। हर फ्लोर पर लाशें बरामद हुई हैं। कई लोग एक-दूसरे का हाथ थामे हुए ही मौत के आगोश में चले गए। ऐसा लगता है कि आग लगने के बाद होटल के स्टाफ ने मेहमानों को भटकने के लिए छोड़ दिया था।’’

शादी में आए थे, मना रहे मातम : इस हादसे में 17 लोगों ने जान गंवा दी। इनमें 3 लोग केरल के ही एक परिवार के थे, जो शादी में शामिल होने दिल्ली आए थे। इस परिवार के ही एक सदस्य सुरेंद्र कुमार ने बताया, ‘‘जब होटल में आग लगी तो मैं सेकंड फ्लोर पर था। सुबह करीब 4 बजे मैं अपनी भाभी की चीख सुनकर जागा था। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो कॉरिडोर में चारों तरफ धुआं नजर आया। साथ ही, जलने की दुर्गंध आ रही थी। मैं कॉरिडोर में पहुंचा तो आग लगने की जानकारी मिली। इसके बाद मैंने अपने बाकी रिश्तेदारों को जगाया।’’

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