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‘मौत’ के 7 साल बाद वापस घर आ गया सेना का जवान धर्मवीर!

देहरादून में 29 नवंबर 2009 को सेना की लाल बत्ती वाली कार अनियंत्रित होकर एक खड्ड में गिर गई थी। तब कार में जवान धर्मवीर के अलावा और कोई नहीं था।

Author जयपुर | June 16, 2016 10:04 AM
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सड़क हादसे में याददाश्त खो चुके सेना के एक जवान को मृत मान कर उसकी पत्नी के लिए पेंशन शुरू कर दी गई लेकिन सात साल बाद एक अन्य सड़क हादसे ने जवान की याददाश्त लौटा दी। आज वह जवान अपने परिवार के साथ है और उसके घर पर त्योहार जैसा माहौल है। यह वाकया है भारतीय सेना की 66 आर्म्ड रेजिमेंट के जवान धर्मवीर यादव का। यादव ने 2009 में एक सड़क हादसे में अपनी याददाश्त खो दी लेकिन पिछले दिनों हरिद्वार में उसके साथ हुए एक मामूली ‘सड़क हादसे’ के बाद उनकी याददाश्त वापस आ गई। सात साल बाद खोई याददाश्त फिर लौटने पर वह अपने घर आए जहां बहुत कुछ बदल चुका था। सेना ने अपने जवान धर्मवीर यादव को मृत घोषित कर उसकी पत्नी के नाम पेंशन तक आरंभ कर दी थी।

धर्मवीर के पिता और सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार कैलाश यादव ने बुधवार को बताया कि मेरा पुत्र धर्मवीर अप्रैल, 1994 में सेना में 66 आर्म्ड रेजिमेंट में जवान नियुक्त हुआ। देहरादून में नियुक्ति के दौरान 29 नवंबर 2009 को ड्यूटी के समय उसकी लाल बत्ती वाली कार अनियंत्रित होकर एक खड्ड में गिर गई थी। तब कार में और कोई नहीं था। हादसे के तुरंत बाद मीडिया और पुलिस मौके पर पहुंचे लेकिन कार पर लाल बत्ती होने के कारण धर्मवीर को लोगों से दूर रखने के लिए एकांत में बैठा दिया गया था। कैलाश यादव ने बताया कि सिर में चोट लगने से धर्मवीर की याददाश्त चली गई और वह चुपचाप वहां से रवाना हो गया। उसे खोजा गया और उसका पता नहीं लगने पर सेना ने 26 सितम्बर, 2012 को उसे मृत घोषित कर उसकी पत्नी के नाम प्रतिमाह आठ हजार रुपए की पेंशन आरंभ कर दी।

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यादव ने बताया कि परिवार भी धर्मवीर को मृत मान चुका था। उसकी दो बेटियां हैं। कुछ दिन बाद सब कुछ सामान्य हो गया। इस बीच, धर्मवीर हरिद्वार पहुंच गया। करीब एक सप्ताह पहले हरिद्वार में एक मोटरसाइकिल ने उसे टक्कर मार दी और उसे सिर में चोट लग गई। चोट लगने के बाद धर्मवीर की याददाश्त लौट आई और खुद को भिखारी जैसी हालत में पाकर वह दंग रह गया। परिजन के अनुसार धर्मवीर ने जब लोगों से बोलना चाहा तो उसकी अजीब हालत, भिखारी जैसा हुलिया और दुर्गंध भरे शरीर को देख कर उससे किसी ने बात नहीं की। एक व्यक्ति ने उसके हाथ में पांच सौ रुपए का नोट रखा और चला गया।

उन्होंने बताया कि धर्मवीर ने उन 500 रुपए से अपनी हजामत बनवाई, बाल कटवाए और 50 रुपए में पुराने कपड़े खरीदे। फिर वह बस से सोमवार की रात को बहरोड : जयपुर दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अपने गांव पहुंचा। बहरोड को बदले हालत में देखकर उसने ग्रामीणों से पूछा और पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो गया।

हृदय के आॅपरेशन के बाद आराम कर रहे धर्मवीर के पिता ने बताया कि रात को जब घर पर पहुंच कर धर्मवीर ने दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने उससे पूछा कि वह कौन है। दरवाजा खोलने पर सामने धर्मवीर था। उसे देख कर, उससे बातें कर कैलाश यादव और उनके परिवार वालों को भरोसा ही नहीं हुआ। सात साल पहले कथित तौर पर मर चुके धर्मवीर के लौटने की खबर सुन कर लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ। उससे मिलने और उसे देखने आने वालों का तांता लगा है। कैलाश ने कहा कि उन्होंने सेना की 66 आर्म्ड रेजिमेंट को धर्मवीर के जिंदा होने और घर आने की सूचना दे दी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। कैलाश यादव ने बताया कि धर्मवीर की स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए उसका भाई बुधवार को ही उसे जयपुर लेकर गया है। इस बीच, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी यादव ने बताया कि 66 आर्म्ड रेजिमेंट के मृत घोषित किए जा चुके जवान धर्मवीर यादव के जीवित घर लौट आने के बारे में रेजिमेंट के कमान अधिकारी को सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा कि धर्मवीर को उसकी मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद कमान को सौंपा जाएगा। फिलहाल धर्मवीर के स्वास्थ्य की जांच की प्रक्रिया चल रही है।

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हादसे में कैसे गई थी याददाश्त –
देहरादून में 29 नवंबर 2009 को सेना की लाल बत्ती वाली कार अनियंत्रित होकर एक खड्ड में गिर गई थी। तब कार में जवान धर्मवीर के अलावा और कोई नहीं था। हादसे के तुरंत पुलिस मौके पर पहुंचे लेकिन कार पर लाल बत्ती होने के कारण धर्मवीर को लोगों से दूर रखने के लिए एकांत में बैठा दिया गया था। परिजनों के अनुसार सिर में चोट लगने से धर्मवीर की याददाश्त चली गई और वह चुपचाप वहां से रवाना हो गया।

हादसे से ही लौटी याददाश्त –
इस बीच धर्मवीर हरिद्वार पहुंच गया। करीब एक सप्ताह पहले हरिद्वार में एक मोटरसाइकिल ने धर्मवीर को टक्कर मार दी और उसे सिर में चोट लग गई। चोट लगने के बाद धर्मवीर की याददाश्त लौट आई और खुद को भिखारी जैसी हालत में पाकर वह दंग रह गया। परिजनों के अनुसार एक व्यक्ति ने उसे पांच सौ रुपए दिए। इससे धर्मवीर ने बाल कटवाए, पुराने कपड़े खरीदे और फिर वह बस से सोमवार की रात अपने गांव पहुंचा।

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