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उत्पीड़न और ‘क्रीड़ा’ में अंतर को समझे सरकार : यौनकर्मी

यौनकर्मियों के संगठन आॅल इंडिया नेटवर्क आॅफ सेक्स वर्कर (एआइएनएसडब्लू) की अध्यक्ष कुसुम ने कहा- सरकार को समझना होगा कि मानव तस्करी, नाबालिग वैस्यावृत्ति या यौन उत्पीड़न समाज का एक पहलू है और यौन क्रीडा दूसरा पहलू है। इसे रोकने के लिए पहले से कानून है।

Author July 19, 2018 4:11 AM
यौनकर्मियों ने इसे सिरे से खारिज कर इसे मानव अधिकार का हनन कराने वाला कानून करार दिया है। (Source: Praveen Khanna)

यौनकर्मियों ने सांसदों से अपील की है कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर ट्रैफिकिंग आॅफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रिहैबीलिटेशन) बिल 2018 पास करने से पहले उनके समाजिक पहलुओं पर ध्यान दें। देश में कहीं भी रहने और कोई भी आजीविका चलाने की संविधान प्रदत्त अधिकार का हवाला देते हुए यौनकर्मियों के संगठन आॅल इंडिया नेटवर्क आॅफ सेक्स वर्कर (एआइएनएसडब्लू) की अध्यक्ष कुसुम ने कहा-स्वेच्छा से यौन कार्य को बतौर आजीविका चलाने वाली महिलाओं को बगैर उनकी मर्जी से उनके ठिकानों पर छापा मारना, उन्हें जिलाबदर कर उन्हें जबरन किसी शिविर में रखने वाले कानून को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार को समझना होगा कि मानव तस्करी, नाबालिग वैस्यावृत्ति या यौन उत्पीड़न समाज का एक पहलू है और यौन क्रीडा दूसरा पहलू है। इसे रोकने के लिए पहले से कानून है। उसे कड़ाई से लागू करने की जरूरत है, न कि एक और कानून बनाने की। यौनकर्मियों ने इसे सिरे से खारिज कर इसे मानव अधिकार का हनन कराने वाला कानून करार दिया है।

बता दें कि महिला और बाल विकास मंत्रालय की ओर से लाए गए इस विधेयक को सरकार बुधवार को पेश कर चुकी है। यौनकर्मियों का दावा है कि विधेयक के पास हो जाने के बाद इसमें उनके ठिकानों को बंद करने, उन्हें वहां से हटाकर पुनर्वास करने, शिविरों में रखने, आदि से जुड़े अधिकार मजिस्ट्रेट को मिलेंगे। हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट की ईनाक्षी गांगुली, बंधुआ मजदूरी के खिलाफ काम करने वाले किरण कमल प्रसाद, लायर्स कलेक्टिव के वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर व सेंटर फॉर एडवोकेशी एंड रिसर्च सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी यौनकर्मियों के अधिकारों के नजरिए से इस विधेयक का तीखा विरोध किया। उन्होंने सरकार व सांसदों से इस विधेयक को पास करने से पहले इससे प्रभाविक होने वाले यौनकर्मियों की बाते सुनने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि मानव तस्करी, नाबालिग वैश्यावृत्ति या यौन उत्पीड़न, बंधुआ मजदूरी, को रोकने और मजदूरों के पुनर्वास के लिए भारतीय दंड सहिता में पहले से कानून है। उनके लिए सजा का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून को बनाया जाना अप्रासांगिक है।

कैलाश सत्यार्थी ने सराहा
नोबल पुरस्कार विजेता और बचपन बचाओं आंदोलन के जनक कैलाश सत्यार्थी ने कैलाश सत्यार्थी ने ट्रैफिकिंग आॅफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रिहैबीलिटेशन) बिल 2018 की सराहना की है। उन्होंने इसे मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ सख्त कानून के पैमाने पर समाज के लिए मील के पत्थर बताया है। उन्होंने कहा- इस कानून में पीड़ितों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित मानव तस्करी के गठजोड़ को तोड़ने के लिए संपत्ति की कुर्की जब्ती और अपराध से प्राप्त धन को जब्त करने का प्रावधान की उन्होंने सराहना की।

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