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इशरत जहां: बीजेपी के लिए प्रचार करने को तैयार पर बेटे को पढ़ाने के लिए जेब में पैसे नहीं

इशरत को घर का खर्च चलाने के लिए बहन हर महीने दो-तीन हजार रुपये देती है।

Author हावड़ा | January 3, 2018 4:36 PM
हावड़ा स्थित बीजेपी कार्यालय में इशरत जहां। (पार्थ पॉल, इंडियन एक्सप्रेस)

रवीक भट्टाचार्य

तीन तलाक के खिलाफ चलाए गए अभियान का चेहरा रहीं इशरत जहां आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। पैसों की कमी के कारण वह अपने बेटे को स्कूल नहीं भेज पा रही हैं। नौकरी के अभाव में इशरत को बेटे की पढ़ाई-लिखाई की चिंता खाए जा रही है। इसके बावजूद वह भाजपा के लिए प्रचार करने को तैयार हैं। इशरत शनिवार (30 दिसंबर) को बीजेपी में शामिल हुई थीं। इसके बाद वह रोजाना अपने घर से तकरीबन दो किलोमीटर दूर स्थित पार्टी कार्यालय जाती हैं। बेजेपी को इशरत के रूप में एक मजबूत चेहरा मिल गया है।

इशरत जहां उन पांच लोगों में हैं, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। फिलहाल उनके लिए सबसे बड़ी समस्या आर्थिक तंगी है। इशरत ने कहा, ‘मेरी वित्तीय स्थिति जस की तस है। मेरी बहन हर महीने मेरे लिए दो-तीन हजार रुपये भेजती है। लेकिन, यह काफी नहीं है। मुझे जीने और खाने के अलावा बेटे को पढ़ाना भी है। मैं बेटे का दाखिला किसी स्कूल में नहीं करा सकती हूं, क्योंकि मेरे पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं।’ उनकी एक और समस्या है। इशरत ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए अपने गहने गिरवी रख दिए थे। उनके लिए कर्ज चुका कर उसे वापस पाना बड़ी सिरदर्दी है। इशरत की वर्ष 2001 में शादी हुई थी। उनके पति मुर्तजा ने अप्रैल, 2015 में तीन बार तलाक बोल कर संबंध खत्म कर लिया था। बीजेपी में शामिल होने के बाद इशरत पश्चिम बंगाल के साथ देश के अन्य हिस्सों में प्रचार करने के लिए तैयार हैं। वह चुनाव भी लड़ना चाहती हैं।

राजनीति सीख रही हूं: इशरत ने कहा, ‘मैं राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानती, लेकिन सीख रही हूं। मैं मुस्लिम महिलाओं की मदद करने के अलावा उनकी समस्याओं के समर्थन में अभियान चलाने की योजना बना रही हूं। हालांकि, पार्टी जो भी कहेगी मैं वह करूंगी।’ उन्होंने बताया कि बीजेपी महिला मोर्चा की नेता अगस्त, 2017 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से ही उनके संपर्क में थीं। इशरत ने कहा, ‘मैं बीजेपी कार्यालय भी जाती थी, लेकिन उस वक्त पार्टी ज्वाइन करने को लेकर कोई बात नहीं होती थी। तीन तलाक के खिलाफ संसद में विधेयक पेश होने के बाद मेरे लिए बीजेपी में शामिल होने का मुफीद समय आ गया था। मुझे लगा कि बीजेपी मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाया गया विधेयक मेरी जैसी लाखों महिलाओं और बच्चों की जिंदगी बचाने में कारगर होगा।’

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