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पूर्व कांग्रेसी सीएम वीरभद्र सिंह के वकील पर भड़क गए जज, केस से हुए अलग

न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी ने वीरभद्र सिंह के वकील की जमकर खिंचाई की, जो बार-बार यह कहकर मामले की सुनवायी कुछ देर बाद करने पर जोर दे रहे थे कि वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले में पेश होना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल दूसरी अदालत में व्यस्त हैं।

Author Updated: January 31, 2019 10:42 AM
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में अति नाटकीय घटनाक्रम के बीच एक सप्ताह के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश ने दंपति के वकील पर नाराजगी जताते हुये इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी ने बुधवार को सिंह के वकील की जमकर खिंचाई की, जो बार-बार यह कहकर मामले की सुनवायी कुछ देर बाद करने पर जोर दे रहे थे कि वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले में पेश होना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल दूसरी अदालत में व्यस्त हैं।

सिंघवी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रवक्ता हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने 24 जनवरी को बिना कोई कारण बताए मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था, जिसके बाद न्यायमूर्ति वजीरी के समक्ष यह मामला पहली बार बुधवार को आया।

सुनवाई शुरू होने के बाद, सिंह के वकील ने यह कहते हुए कुछ समय मांगा कि सिंघवी को मामले में पेश होना है, लेकिन वह एक अन्य अदालत में व्यस्त हैं, जिस पर न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा कि इस मामले में कोई जल्दीबाजी नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित नहीं हुई है और इसकी सुनवायी अगली तारीख पर हो सकती है। लेकिन सिंह के वकील मामले की सुनवायी कुछ देर बाद करने पर जोर देते रहे।

इस पर नाराज होकर न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा, ‘‘मेरे सामने किसी के नाम का जिक्र मत करो। मैं इसकी सुनवायी आज क्यों करूँ? इसमें क्या खास बात है? यह मामला कोई व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ नहीं है।’’ न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वकील को पता होना चाहिए कि उन्हें क्या कहना है और क्या नहीं। मैं इस मामले की सुनवाई नहीं करूंगा। किसी अन्य पीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध कराओ।’’ वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन तब सिंह की ओर से पेश हुए और यह कहते हुये माफी मांगी कि वह किसी अन्य मामले में फंस गए थे, जिसके चलते समय पर नहीं पहुंच सके।

इस पर, न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा कि दूसरे वकील ने यह नहीं कहा था कि कृष्णन को मामले में पेश होना है, बल्कि उन्होंने तो एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता (सिंघवी) का नाम लिया था। इसके बाद, कृष्णन ने और कुछ नहीं कहा और अदालत ने 6 फरवरी को एक अन्य पीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध कर दिया।
गौरतलब है कि निचली अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में 10 दिसंबर, 2018 को 82 वर्षीय वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सिंह और उनकी पत्नी ने 23 जनवरी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

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