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एक और कारोबारी ने दबाए बैंक के 500 करोड़ रुपए, CBI के पास पहुंचे बैंक

बैंक लगातार विक्रम कोठारी और फर्म के डायरेक्टरों से पत्राचार कर रहा है, लेकिन कर्ज की रकम नहीं चुकाई जा रही। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से एक साल के दौरान भेजे गए सामान्य नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा है।

Author February 18, 2018 4:06 AM
सीबीआई ऑफिस।

पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले की जांच चल ही रही है कि एक अन्य उद्योगपति का नाम 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का बैंक कर्ज दबा लेने में सामने आया है। यूनियन बैंक और इलाहाबाद बैंक द्वारा कर्ज की रकम नहीं लौटाने की शिकायत पर रायपुर पुलिस ने रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी के रायपुर और कानपुर स्थित ठिकानों पर छापे मारे हैं। सीबीआइ के पास भी बैंकों ने शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत दर्ज कराने में दो और बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक व बैंक ऑफ इंडिया भी शामिल हैं। विक्रम कोठारी ने पांचों बैंक से कुल 5000 करोड़ से ज्यादा की रकम बतौर कर्ज ले रखी है। इनमें से दो बैंकों- यूनियन बैंक और इलाहाबाद बैंक ने कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक ऑफ इंडिया ने भी सेबी को उनकी शिकायत भेजी है।

यूनियन बैंक की कानपुर स्थित शाखा के प्रबंधक पीके अवस्थी ने अपनी शिकायत में कहा कि रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने बैंक से 485 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। वापस नहीं किया। पिछले एक साल से उनसे संपर्क नहीं हो रहा है। संदेह है कि वे विदेश चले गए हैं। उनके खिलाफ एनसीएनटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। हम विक्रम कोठारी की कई संपत्तियों को बेचने की तैयारी है।

इसके अलावा, विक्रम कोठारी ने इलाहाबाद बैंक से भी 352 करोड़ का कर्ज लिया हुआ है। इलाहाबाद बैंक के मैनेजर राजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दी गई शिकायत के मुताबिक विक्रम कोठारी पर बैंक ऑफ इंडिया का 1395 करोड़ रुपए का कर्ज है। उनकी चार कंपनियों के नाम से शहर की बिरहाना रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया ब्रांच में चार अलग-अलग खाते हैं। ये सभी खाते वर्ष 2015 में एनपीए हो चुके हैं।

बैंक लगातार विक्रम कोठारी और फर्म के डायरेक्टरों से पत्राचार कर रहा है, लेकिन कर्ज की रकम नहीं चुकाई जा रही। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से एक साल के दौरान भेजे गए सामान्य नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा है। उनकी जिन कंपनियों के नाम पर बड़ी रकम बकाया है, वे हैं- रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (830 करोड़), कोठारी फूड एंड फ्रेगरेंस (155 करोड़), रोटोमैक एक्सपोर्ट (245 करोड़) व क्राउन एल्वा (165 करोड़)।

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