कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान लेकिन रद नहीं हुई ट्रैक्टर रैली, राकेश टिकैत बोले- सरकार से बात करने के लिए आंदोलन

किसान नेताओं ने कहा है कि 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर रैली करने का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अपनी तय समय सीमा और प्रक्रिया के साथ होगी। इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि एमएसपी को कानून बनाने के लिए सरकार को खुली चिट्ठी लिखी जाएगी।

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किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो सोर्स – पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि 29 नवंबर को ट्रैक्टर मार्च में 60 ट्रैक्टर जाएंगे। ट्रैक्टर उन रास्तों से होकर जाएंगे, जो रास्ते सरकार ने खोले हैं। उन्होंने कहा, “हम पर इल्जाम लगा था कि हमने रास्ते बंद कर रखें हैं। हमने रास्ते बंद नहीं किए। हमारा आंदोलन सरकार से बात करने का है।” सरकार जब हमें बुलाएगी और समय देगी तो हम अपने सभी मुद्दों पर बात करेंगे। कहा कृषि कानूनों को वापस ले लेने के आश्वासन से ही आंदोलन नहीं खत्म हो जाएगा।

किसान नेताओं ने कहा है कि 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर रैली करने का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अपनी तय समय सीमा और प्रक्रिया के साथ होगी। इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि एमएसपी को कानून बनाने के लिए सरकार को खुली चिट्ठी लिखी जाएगी। इसमें पराली को लेकर कानून और बिजली को लेकर कानून बनाने की भी मांगे होंगी।

किसानों का कहना है कि जो कुछ पहले से आंदोलन में तय हुआ है, वह चलता रहेगा। सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन जब तक वह संसद में पूरी तरह से वापस नहीं हो जाता है और हमारी बाकी मांगों को लेकर ठोस फैसला नहीं हो जाता है तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा।

बीते 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया और साथ ही उन्होंने एमएसपी सहित दूसरे मुद्दों पर एक कमेटी बनाने का आश्वासन भी दिया। प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान के बावजूद किसान संगठनों ने तत्काल आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया। किसान आंदोलन की वापसी को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सिर्फ एक मुद्दा कम हुआ और बाकी सभी मुद्दे शेष हैं। साथ ही उन्होंने पेनाल्टी सिस्टम का जिक्र कर कहा कि 750 किसान शहीद हुए उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि कृषि क़ानून वापस हुए हैं। हमारे सारे मुद्दों में से केवल एक मुद्दा कम हुआ है, बाकी मुद्दे अभी बचे हुए हैं। उन मुद्दों पर भी विचार होने के बाद ही आंदोलन खत्म करने पर विचार होगा।

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