पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को बताया कि आधार कार्ड से संबंधित मुद्दों के कारण अन्नपूर्णा योजना के लगभग 17 लाख आवेदकों के नाम खारिज कर दिए गए। यह जानकारी नबन्ना में स्वास्थ्य राज्य मंत्री सुमाना सरकार, सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों की राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती और महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव मौमिता गोदारा द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की गई।

अन्नपूर्णा योजना पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गयी महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजना है। सरकार 17 से 20 अगस्त के बीच 1.62 करोड़ आवेदकों में से 1.45 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में तीसरी किस्त का वितरण करेगी और इसके लिए 4,350 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

17 नामों को क्यों अस्वीकार किया गया?

सूत्रों के अनुसार, नामों को अस्वीकार करने का मुख्य कारण बैंक खातों का आधार से लिंक न होना था। अस्वीकृत 17 लाख मामलों में से लगभग 10 लाख मामले आधार से संबंधित समस्याओं के कारण थे। इसके अलावा, कई आवेदन इसलिए भी खारिज कर दिए गए क्योंकि आवेदक या परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी करता था या रिकॉर्ड से पता चला कि वे आयकर का भुगतान करते हैं। सूत्रों ने बताया कि 11 जुलाई से 31 जुलाई के बीच आवेदन करने वालों के दस्तावेजों का सत्यापन चल रहा है और यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी।

आवेदन अस्वीकृत होने के बाद पोर्टल पर दोबारा आवेदन कर सकते

आधार और बैंक खाते को जोड़ने से संबंधित समस्याओं को आसानी से हल करने के लिए, नबन्ना ने ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) को बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय करने और विशेष शिविर आयोजित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। जिन आवेदकों का आवेदन अस्वीकृत हो गया है, वे सरकारी पोर्टल पर सोशल रजिस्टर विकल्प का उपयोग कर दोबारा आवेदन कर सकते हैं, जहां रिन्यूल विंडो 20 अगस्त को खुलेगी। सभी दस्तावेजों का जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा और सत्यापन के बाद वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते

आवेदन अस्वीकृति के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत या आपत्ति होने पर, वे सीधे इसी पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, नए आवेदन जमा करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 30 सितंबर तक इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि केंद्र या राज्य सरकार, वैधानिक निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों, नगरपालिकाओं या सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों (शिक्षकों या गैर-शिक्षण कर्मचारियों) में स्थायी रूप से कार्यरत व्यक्ति, साथ ही उनके परिवार, इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

60 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगी भी इस योजना से बाहर हैं। इसके अतिरिक्त, 12 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार (आयकर दाता) और 10,000 रुपये प्रति माह से अधिक कमाने वाली महिलाएं भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगी।

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के 100 दिन पूरे होने पर बात करना जरूरी हो जाता है कि उनके सत्ता में आने के बाद से अब तक पश्चिम बंगाल में क्या कुछ बदला है। हालांकि, इन 100 दिनों की उपलब्धियों को यह गिनकर नहीं समझा जा सकता कि सरकार ने कितने फैसले लिए। बंगाल में असली बदलाव उन चीजों में भी दिखाई दे रहा है जो सरकार की राजनीतिक पहचान बनाती हैं। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें