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तेलुगु मीडिया ने बदल दिया भारत के सबसे भारी रॉकेट ‘फैट ब्वॉय’ का नाम

तेलुगु मीडिया द्वारा बाहुबली बुलाए जाने के बाद अब इस रॉकेट के दो नाम हो गए हैं।

Author विशाखापट्नम | June 6, 2017 3:15 PM
यह अब तक का सबसे वजनी रॉकेट है, इसका वजन 640 टन है।

पूरी तरह से भारत में बने रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 का सोमवार को सफल परीक्षण किया गया। इसरो द्वारा बनाए गए इस रॉकेट का नाम फैट ब्वॉय रखा गया है लेकिन तेलुगु मीडिया ने इसका फिर से नामकरण कर दिया। इस रॉकेट के लांच होने के बाद तेलुगु मीडिया ने इसे बाहुबली के नाम से बुलाया। तेलुगु मीडिया द्वारा बाहुबली बुलाए जाने के बाद अब इस रॉकेट के दो नाम हो गए हैं। इससे पहले इसरो के वैज्ञानिकों ने जीएसएलवी 2 का नाम भी रखा था। वैज्ञानिक जीएसएलवी 2 को नॉटी ब्वॉय के नाम से बुलाते हैं। आपको बता दें कि इसकोजीएसएलवी मार्क 3 को श्री हरिकोटा से अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। यह भारत का सबसे वजनी रॉकेट है। यह GSAT 19 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा।

इस रॉकेट का वजन 640 टन है। यह आठ टन वजन अंतरिक्ष में लेकर जा सकता है। इस रॉकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रॉकेट के मुख्य व सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन को इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत में ही विकसित किया है, जो पहली बार किसी रॉकेट को उड़ने की शक्ति प्रदान करेगा। यह 300 करोड़ की लागत से बना है। पहले यह रॉकेट मई के अंत में छोड़ा जाना था। सफल लॉन्च पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसरो को बधाई दी। मोदी ने कहा कि इस मिशन की कामयाबी पर भारत को गर्व है। वहीं राष्ट्रपति ने सबको बधाई देते हुए कहा कि इस उपलब्धि पर भारत को गर्व है।

रॉकेट के साथ छोड़ा जाने वाला संचार उपग्रह जीसैट-19 लगभग 3.2 टन वजनी है। यह किसी घरेलू स्तर पर निर्मित रॉकेट से छोड़ा जाने वाला अब तक का सबसे वजनी उपग्रह होगा। इसरो के अनुसार, जीसैट-19 बहु-तरंगी उपग्रह है, जो का और कू बैंड वाले ट्रांसपोंडर्स अपने साथ लेकर जाएगा। इस उपग्रह की उम्र 15 वर्ष होगी। इसरो इससे पहले 2014 में बिना क्रायोजेनिक इंजन वाला इसी तरह का रॉकेट छोड़ चुका है, जो 3.7 टन भार ले जाने में सक्षम था।

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