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जानें कैसा रहा आन्ध्र प्रदेश के लिए साल 2016

एक यादगार घटना यह रही कि राज्य के प्रशासनिक बेस को हैदराबाद से हटाकर अमरावती स्थानांतरित कर दिया गया।

Author अमरावती | December 28, 2016 5:58 PM
भारत का आंध्रप्रदेश राज्य।

ढाई बरस के आन्ध्र प्रदेश के लिए साल 2016 उतारचढ़ाव वाला रहा। इस साल की एक यादगार घटना यह रही कि राज्य के प्रशासनिक बेस को हैदराबाद से हटाकर अमरावती स्थानांतरित कर दिया गया। अन्यथा हैदराबाद एक जून 2024 तक के लिए तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी बना रहता। आन्ध्र प्रदेश का सचिवालय अस्थायी तौर पर ही सही, अक्तूबर से वेलांगपुडी गांव से काम करने लगा। राज्य के नए राजधानी शहर का विकास करने में नाकामी चन्द्रबाबू नायडू सरकार की बड़ी विफलता रही। भावी राजधानी को लेकर कयासों के बीच सरकार ने पूरे साल अमरावती के लिए डिजाइन को अंतिम रूप नहीं दिया जिससे निर्माण में विलंब हुआ। इस साल राज्य की आर्थिक वृद्धि दर ‘दो अंकों’ में रही।

वास्तव में राज्य अपने बड़े राजस्व घाटे की भरपाई करने में संघर्षरत रहा, जो जून 2014 में विभाजन के बाद उसे विरासत में मिला था। वर्ष 2015-16 में राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 10.99 प्रतिशत रही और 2016-17 की पहली छमाही में यह 12.23 प्रतिशत पर पहुंच गयी। हालांकि राज्य के आर्थिक कहानी कई विडंबनाओं से भरी है। वित्तीय वर्ष 2016-17 की पहली छमाही में राज्य की राजस्व आय 13.05 प्रतिशत बढ़कर 22,800 करोड़ रुपए पर पहुंच गयी, जो इससे पिछले साल की इसी छमाही में 20,166 करोड़ रुपए थी। हालांकि इस साल की पहली छमाही में राज्य का राजस्व घाटा भी बढ़कर 6,641 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

नोटबंदी के बाद राज्य के राजस्व में 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गयी। कारोबार में सहूलियत के लिहाज से आन्ध्र प्रदेश देश में सबसे अच्छे राज्यों की सूची में सर्वोपरि रहा, लेकिन यहां उम्मीद के मुताबिक निवेश नहीं आ सका और अभी तक सब कुछ ‘पाइपलाइन’ में ही है। सरकार का दावा है कि जनवरी 2016 में पार्टनरशिप समिट के दौरान हस्ताक्षरित सहमति पत्रों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में करीब चार लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। पर बहुत से समझौते अभी भी केवल कागज पर ही हैं और उनका क्रियान्वयन नहीं हो सका।

आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं हासिल हो सका और विशेष आर्थिक पैकेज पर वह मान गया लेकिन अभी तक विशेष आर्थिक पैकेज का ‘क्रियान्वयन’ भी नहीं हो सका। प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र हालांकि इसकी वास्तविक शान बना रहा और ऊर्जा दक्षता के लिए इस साल आन्ध्र को देश का सबसे बेहतर राज्य माना गया। राजनीतिक स्तर पर तेलगु देशम पार्टी विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस के 67 विधायकों में से 21 को अपने पाले में खींच लायी और अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

सभी राजनीतिक मोर्चों पर विपक्ष की कमजोरियां सत्तारूढ़ पार्टी के लिए ताकत बन गयी, जबकि मतदान के दौरान उसे मतदाताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। राज्य में कांग्रेस पार्टी अभी भी सुस्त पड़ी है, जबकि तेदेपा की सहयोगी भाजपा सत्ता में रह कर भी दमखम नहीं दिखा पाई। करीब एक साल की शीतनिद्रा के बाद 2016 की दूसरी छमाही में फिल्म अभिनेता और जन सेना पार्टी के संस्थापक पवन कल्याण ने राजनीतिक क्षेत्र में अचानक फिर से पर्दापण किया। उन्होंने आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर तीन सभाएं कीं। इसके बाद वह फिर से अपनी फिल्में पूरी करने के लिए चले गये। हालांकि उन्होंने रोहित वेमुला की आत्महत्या और नोटबंदी को लेकर सोशल मीडिया के जरिये केन्द्र और राज्य सरकार आड़े हाथ लिया। लेकिन बहुत देर से सक्रिय होने के कारण सोशल मीडिया पर उन्हें उपहास का शिकार होना पड़ा।

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