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COVID-19 का ऐसा डर! 15 महीनों तक घर में दो बेटियों के साथ कैद रही महिला, डर था- कोरोना हुआ तो नहीं करा पाएंगे इलाज

महिलाओं के घरवाले बोले- "इन तीनों को डर था कि अगर वे कोविड पॉजिटिव हो जाती हैं, तो वे अस्पताल में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते क्योंकि वे गरीब थे।"

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पूर्वी गोदावरी | Updated: July 22, 2021 3:58 PM
आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के गांव का मामला, पुलिस ने महिला और उसकी बेटियों को अस्पताल भेजा। (फोटो- ANI)

आंध्र प्रदेश में कुछ लोगों में कोरोना के डर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कोरोना से बचने के लिए एक महिला और उसकी दो बेटियों ने खुद को लगातार 15 महीने तक घर में कैद रखा। यह मामला राज्य के पूर्वी गोदावरी जिले के कदली गांव का है। पुलिस का कहना है कि मामले का पता चलने पर उन्हें कमजोर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को बताया, “रुथम्मा और उनकी बेटियों कंथामणि (30) और रानी (32) ने मार्च 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित पहले लॉकडाउन के बाद से ही खुद को बंद कर लिया है।” उन्होंने कहा कि केवल रूथम्मा के पति- जॉन बेनी और बेटे चिन्नाबाबू काम के लिए बाहर जाएंगे। जाने से पहले, बेनी तीन महिलाओं के लिए खाना बनाता था और घर वापस लौट के रात का खाना पकाता था।

इन सभी महीनों में पिता-पुत्र की जोड़ी द्वारा कमरों की सफाई और अन्य काम भी किए जाते थे, क्योंकि महिलाएं केवल खुद को शौचालय के इस्तेमाल लिए बाहर निकलती थीं। पिता-पुत्र की जोड़ी ने बताया, “इन तीनों को डर था कि अगर वे कोविड पॉजिटिव हो जाती हैं, तो वे अस्पताल में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते क्योंकि वे गरीब थे। इसलिए उन्होंने सोचा कि बेहतर है कि बाहर न आएं और घर में ही रहें।”

पुलिस के मुताबिक, किसी को शक नहीं था कि क्या हो रहा है क्योंकि पिता और पुत्र घर से बाहर आ जा रहे थे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि राज्य के वार्ड और ग्राम स्वयंसेवक प्रणाली ने पता लगाया होगा कि क्या हो रहा है, एक स्वयंसेवक को सरकारी योजनाओं को 50 घरों तक ले जाने का काम सौंपा गया है।

बताया गया है कि लंबे समय तक अपनी मां और बहनों के व्यवहार को सहन करने के बाद, चिन्नाबाबू ने आखिरकार पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने कहा कि महिलाओं ने बेनी और चिन्नाबाबू की बात नहीं मानी। अधिकारी ने कहा, “पिता-पुत्र मामले को ग्राम सचिवालय में महिला पुलिस के पास ले गए। उनसे हमें सूचना मिली, जिसके बाद सब-इंस्पेक्टर ने उनसे मुलाकात की और उन्हें सलाह दी।”

इसके बाद, तीनों महिलाओं को रज़ोल के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। बताया गया है कि अब उनकी स्थिति स्थिर है, हालांकि वे कुपोषित और कमजोर हैं। इन 15 महीनों में तीनों महिलाओं ने नहाया भी नहीं किया और अंत में जब वे निकलीं तो उनके बालों की हालत भी खराब थी।

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