अलीगढ़ नगर निगम ने कथित तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की 3.8 एकड़ से ज्यादा की जमीन को वापस हासिल कर लिया है, जिसकी कीमत करीब 500 करोड़ रुपये है। यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर ने इस कदम को जबरदस्ती कब्जा बताया है। नगर निगम अधिकारियों ने गुरुवार शाम को जमीन पर बाड़ लगाना शुरू कर दिया और उस जगह पर एक साइनबोर्ड लगा दिया।
इसके बाद वाइस-चांसलर प्रो. नईमा खातून के नेतृत्व में AMU अधिकारियों की एक टीम हालात का जायज़ा लेने के लिए मौके पर पहुंची। नईमा खातून ने इस कार्रवाई को गलत और नामंज़ूर कदम बताया और कहा कि यूनिवर्सिटी इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
वीसी ने क्या कहा?
नईमा खातून ने कहा, “यह बस एक जमीन के प्लॉट पर जबरदस्ती कब्ज़ा है जो कानूनी तौर पर देश के एक ऐतिहासिक हायर लर्निंग सेंटर का है और हमारे पास अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए एक सदी से भी पुराने सभी कानूनी कागज़ात हैं।”
वाइस-चांसलर नईमा खातून ने यूनिवर्सिटी को कोई नोटिस दिए बिना जमीन पर कब्ज़ा करने के सिविक बॉडी के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जिन मामलों में जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से कब्ज़ा किया जा रहा है, उनमें भी अधिकारियों को कार्रवाई करने से पहले कब्ज़ा करने वाले को नोटिस जारी करना चाहिए। हालांकि, नगर निगम कमिश्नर प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि सिविक बॉडी के पास रिकॉर्ड हैं जिनसे पता चलता है कि यह प्लॉट पिछले 40 सालों से उसका है।
प्रेम प्रकाश मीणा ने पत्रकारों से कहा, “हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले 40 सालों से यह जमीन का प्लॉट हमारा है। सिविक बॉडी जल्द ही इस जमीन पर जरूरी शहरी प्रोजेक्ट्स का कंस्ट्रक्शन शुरू करने का प्लान बना रही है।”
AMU प्रॉक्टर नावेद खान ने कहा कि मालिकाना हक का झगड़ा 2023 से एक सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के सामने पेंडिंग था और यूनिवर्सिटी ने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा कर दिए थे। नावेद खान ने PTI को बताया, “यह मामला 2023 से लोकल SDM के पास पेंडिंग है और हमने पहले ही सभी डॉक्यूमेंट्स पेश कर दिए हैं, जिसमें यूनाइटेड प्रोविंस गवर्नमेंट का 13 जून, 1923 का ऑफिशियल नोटिफिकेशन, जब यह ज़मीन हमें ऑफिशियली अलॉट की गई थी, और दूसरे सभी ऑफिशियल रिकॉर्ड शामिल हैं।” सीनियर जिले के अधिकारियों के साथ बातचीत के आधार पर हमें उम्मीद है कि जल्द ही कोई आपसी सहमति से हल निकल जाएगा।”
सीएम योगी से मिलेगा प्रशासन
इसी से जुड़े एक और मामले में ज़मीन अधिग्रहण पर चर्चा करने के लिए AMU टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) की एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। AMUTA के अध्यक्ष तुफैल अहमद ने कहा कि यूनिवर्सिटी के स्टेकहोल्डर्स इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और न्याय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सीनियर अधिकारियों से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो हम ऊपरी अदालतों का रुख करेंगे।” AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके मालिकाना हक के विवाद की केंद्र सरकार से हाई-लेवल जांच की मांग की है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रथम स्वाधीनता संग्राम की वीरांगना अवंतीबाई लोधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में अपने आपको बलिदान कर उन्होंने एक मिसाल प्रस्तुत की। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
