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भाजपा की कमान फिर से अमित शाह के पास

आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के साथ-साथ पार्टी पर भी अपना दबदबा पहले की तरह बरकरार रहने का सबूत दे दिया। अमित शाह रविवार को फिर से निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुन लिए गए।

प्रधानमंत्री ने अमित शाह को बधाई दी और विश्वास जताया कि पार्टी उनके नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छुएगी।

आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के साथ-साथ पार्टी पर भी अपना दबदबा पहले की तरह बरकरार रहने का सबूत दे दिया। अमित शाह रविवार को फिर से निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुन लिए गए। प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि पार्टी उनके नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छुएगी। भाजपा अध्यक्ष के चुनाव की रस्म अदायगी के वक्त वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पार्टी मुख्यालय में मौजूद नहीं थे। लेकिन रविवार रात अमित शाह आडवाणी के घर गए और उनसे आशीर्वाद लिया। शाह मंगलवार को मुरली मनोहर जोशी से भी उनके घर जाकर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

दिल्ली और बिहार की चुनावी हार के बाद मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दबदबे पर अटकलें शुरू हो गई थीं। लेकिन रविवार को अमित शाह को पार्टी का तीन साल के लिए विधिवत और निर्विरोध अध्यक्ष बनवा कर नरेंद्र मोदी ने तमाम अटकलों को ध्वस्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एक तरह से पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए शाह के नाम का प्रस्ताव किया। इनमें कई केंद्रीय मंत्री व भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। नामांकन में किसी अन्य नेता का नाम सामने नहीं आने से अमित शाह को निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया गया। सरकारी कार्यक्रम में व्यस्तता के कारण प्रधानमंत्री मोदी इस समारोह में मौजूद नहीं थे लेकिन वे संसदीय बोर्ड की बैठक में हिस्सा लेंगे जो 28 जनवरी को हो सकती है। शाह के लिए यह तीन वर्षों का पहला पूर्ण कार्यकाल होगा। इससे पहले वे मई 2014 में उस समय भाजपा के तदर्थ अध्यक्ष बने थे जब तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह सरकार में शामिल हो गए थे।

शाह को तीन साल के कार्यकाल के लिए निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद मोदी ने ट्वीट किया – अमित शाह को भाजपा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई। मुझे विश्वास है कि पार्टी उनके नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छुएगी। उन्होंने अन्य ट्वीट में लिखा- अमित भाई में जमीनी स्तर पर कामकाज और समृद्ध सांगठनिक अनुभव दोनों का समावेश है जिससे पार्टी को अत्यधिक लाभ मिलेगा। मोदी के करीबी 51 वर्षीय शाह, लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी की रणनीति बना कर उसे 80 में से 71 लोकसभा सीटें दिलाने के कुछ सप्ताह बाद मई 2014 में उस समय भाजपा अध्यक्ष बने थे जब तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह सरकार में शामिल हो गए थे।

अध्यक्ष के नाते अमित शाह ने अपने 18 महीने के पहले कार्यकाल में प्रतिदिन औसतन 495 किलोमीटर यात्रा की और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए 32 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश गए। शाह के नेतृत्व में भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई और उसके सदस्यों की संख्या तीन करोड़ से बढ़कर 11 करोड़ पहुंच गई। पार्टी महासचिव अरुण सिंह के मुताबिक अध्यक्ष के रूप में अमित शाह ने पहले और तीसरे सोमवार को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क के लिए ‘जन संवाद’ कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया। उन्होंने अपने कामकाज में सादगी, सरलता और मितव्ययिता को तरजीह दी।

शाह के कार्यकाल के दौरान भाजपा महाराष्ट्र और हरियाणा में प्रमुख ताकत बनकर उभरी और दोनों राज्यों में पार्टी सत्ता में आई। उनके नेतृत्व में ही पार्टी ने झारखंड और जम्मू-कश्मीर में जीत दर्ज की। हालांकि दिल्ली और बिहार में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। बहरहाल, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शाह के लिए चुनौती अभी बाकी है क्योंकि पार्टी को इस साल पांच राज्यों में चुनाव का सामना करना है और अगले साल उत्तर प्रदेश में भी चुनाव होंगे। अब जबकि शाह नया कार्यकाल शुरू कर रहे हैं तो पार्टी के संसदीय बोर्ड, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सहित उसकी निर्णायक इकाइयों और विभिन्न विभागों का आगामी दिनों में पुनर्गठन होगा।

भाजपा अध्यक्ष के चुनाव की रस्म अदायगी के वक्त वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पार्टी मुख्यालय में मौजूद नहीं थे। समझा जाता है कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ‘मार्गदर्शक मंडल’ का सदस्य बनाए जाने के बाद नाराज चल रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि मार्गदर्शक मंडल का सदस्य बनाए जाने से यह संकेत मिलता है कि ये नेता अब पार्टी के मामलों के लिए अप्रासंगिक हो गए हैं। सर्वसम्मति से भाजपा अध्यक्ष पद पर पुन:निर्वाचित अमित शाह बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के लिए आडवाणी और जोशी से मिलेंगे। एक पार्टी सूत्र के अनुसार, शाह आडवाणी से रविवार रात ही मिलना प्रस्तावित था। शाह सोमवार को एक दिन के दौरे पर पश्चिम बंगाल जाएंगे और वहां से लौटने के बाद मंगलवार को वह जोशी से मिलेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि तीन साल के कार्यकाल के लिए निर्वाचित शाह बीमार चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मंगलवार को मुलाकात करेंगे।

* निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष, चुनावी रस्म अदायगी के वक्त लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पार्टी मुख्यालय में मौजूद नहीं थे

* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया – अमित भाई में जमीनी स्तर पर कामकाज और समृद्ध सांगठनिक अनुभव दोनों का समावेश है जिससे पार्टी को अत्यधिक लाभ मिलेगा।

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