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MP: ऑक्सीजन की कमी के बीच अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे बजुर्ग दंपति, पर न बना काम! ऑटो में ही काटने पड़े 9 घंटे

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी की बात कहते हुए मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र इंदौर | Updated: April 16, 2021 2:25 PM
मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से अस्पताल में भर्ती नहीं हो पा रहे मरीज। (प्रतीकात्मक फोटो- PTI)

भारत में कोरोनावायरस के बढ़ते केसों के बीच बड़े राज्यों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो रही है। इनमें महाराष्ट्र, यूपी के बाद मध्य प्रदेश भी शामिल है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दावों के बावजूद यहां अस्पतालों में मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि गंभीर मरीजों को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसा ही मामला राज्य की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली इंदौर से भी आया है। यहां एक महिला को कोरोना हो जाने के बाद ऑक्सीजन की किल्लत का हवाला देते हुए अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके चलते महिला को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ ऑटो में बैठकर ही अस्पतालों के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ा।

बताया गया है कि बुजुर्ग महिला का नाम चित्रलेखा है। उनकी उम्र 62 साल है। कोरोना से संक्रमि होने के बाद उनके पति ज्ञानसिंह नीम उन्हें लेकर अस्पतालों के चक्कर काटते नजर आए। इस दौरान उन्होंने खुद के संक्रमित होने की परवाह तक नहीं की। लेकिन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी की बात कहते हुए मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया।

जिन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी की बात कही उनमें अरबिंदो और इंडेक्स जैसे शहर के बड़े अस्पताल भी शामिल हैं। करीब 9 घंटे तक एक ऑटे में भटकने के दौरान यह दंपति पहले अरबिंदो पहुंची, फिर एमटीएच, गीताभवन, एमवायएच. सुपर स्पेशिएलिटी, बॉम्बे हॉस्पिटल, अरिहंत अस्पताल तक गए। लेकिन कहीं जगह नहीं मिली। बताया गया है दंपति ने अरबिंदो और एमटीएच के तो तीन चक्कर लगाए, लेकिन कहीं जगह नहीं मिली। इस दौरान चित्रलेखा ने ऑटो में ही सिलेंडर के सहारे ऑक्सीजन ले कर खुद को किसी तरह संभाले रखा।

आखिरकार शाम 6.30 बजे के आसपास उन्हें रिया अस्पताल में 50 हजार रुपए जमा करने के बाद भर्ती किया गया। दंपति ने ऑटो वाले को एक हजार रुपए दिया। जानकारी के मुताबिक, यह समस्या इस वक्त हर दूसरे मरीज को आ रही है। कई मरीजों के परिजन तो अस्पतालों के बाहर लाइन में भर्ती कराने के लिए इंतजार करते दिखे। यहां तक कि डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों में भी मरीज भर्ती न करने का दुखड़ा सुनने को मिला।

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