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कोरोना काल में केरल में भी मनरेगा बना लाइफलाइन, नौकरी खो चुके इंजीनियर कर रहे पौधों की रोपाई, एक पंचायत में 1537 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन

पिछले हफ्ते ऑटोमोबाइल इंजीनियर कृष्णकुमार केपी ने पठानमथिट्टा के थोट्टापुजहासेरी गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम शुरू किया।

Author Translated By Ikram तिरुवनंतपुरम | Updated: July 22, 2020 3:26 PM
covid-19 lockdownराज्य के कासरगोड में खेतों में काम करते लोग। (एक्सप्रेस फोटो)

कोरोना वायरस महामारी से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक केरल भी बुरी तरह प्रभावित है। राज्य को रोजगार के स्तर पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मनरेगा योजना एक बड़ी आबादी की लाइफलाइन बनकर उभरी है। पिछले हफ्ते ऑटोमोबाइल इंजीनियर कृष्णकुमार केपी ने पठानमथिट्टा के थोट्टापुजहासेरी गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम शुरू किया। केपी ने कहा कि राज्य में केवल यही उपलब्ध काम है। मैं पौधारोपण कर रहा हूं। 23 वर्षीय कृष्णकुमार कहते हैं कि स्थानीय विक्रेता के यहां से उनकी नौकरी छूट गई।

इसी तरह पांच ग्रेजुएट्स ने कोझीकोड के अजियुर गांव में इस योजना के तहत काम करने के लिए नामंकन दर्ज करवाया है। ऐसा पहली बार है जब इन पुरुषों ने इस योजना के तहत काम करने के लिए हस्ताक्षर किए। एक अधिकारी ने बताया कि इस पंचायत में पहले 1537 लोग थे और ये सभी महिलाएं थीं।

कासरगोड के बेदादका पंचायत के अध्यक्ष सी रामचंद्रन ने बताया कि उन्होंने उन लोगों के लिए एक अभियान शुरू किया है जिनकी नौकरी जा चुकी है। वो यहां आएं और अपना नामंकन दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह में चार लोगों ने इसके तहत रोजगार पाया है।

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मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो महीने में राज्य में 30 हजार से अधिक घरों को इस योजना के तहत जोड़ा गया है। प्रदेश के सभी जिलों में रोजगार कार्ड की मांग अभी भी बनी हुई है। अधिकारी इस तरह की प्रवत्ति के लिए कई बिंदुओं की तरफ इशारा करते हैं।

उनके मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में प्रति घर रोजगार प्रदान करने के औसत दिन 55.73 थे। इस बार भले ही कोविड-19 के कारण ये योजना पूरी तरह से चालू होनी बाकी है मगर आंकड़ा पहले से ही 18.26 पर है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ तीन महीने में 82 परिवारों ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए चिह्नित 100 दिनों का काम पूरा कर लिया है। कई परिवारों ने 60-90 दिन पूरे कर लिए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोविड-19 दिशा-निर्देशों की वजह से इससे बाहर रखा गया है। इस योजना के तहत काम करने वाले अधिक सेवा और निर्माण क्षेत्रों में कार्यरत थे।

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