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मिलेनियम डिपो बाढ़ वाले क्षेत्र में है तो मास्टर प्लान बदलें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया कि यदि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यह पाया है कि मिलेनियम बस डिपो यमुना के बाढ़ वाले क्षेत्र में स्थित है तो 2021 के मास्टर प्लान में संशोधन या बदलाव किया जाए।

Author नई दिल्ली | January 14, 2017 12:56 AM

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया कि यदि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यह पाया है कि मिलेनियम बस डिपो यमुना के बाढ़ वाले क्षेत्र में स्थित है तो 2021 के मास्टर प्लान में संशोधन या बदलाव किया जाए। अधिकरण इस मामले पर विचार कर रहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अंतत: यह निष्कर्ष निकलता है कि यह नदी का किनारा है तो मामला यहीं खत्म हो जाता है, पर यह पाया गया है कि यह बाढ़ वाले मैदान पर है तो मास्टर प्लान में संशोधन करना होगा और डिपो का इस्तेमाल किसी अन्य काम के लिए नहीं होना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि वस्तुस्थिति यह है कि यह सवाल अधिकरण के पास लंबित है कि क्या दिल्ली परिवहन निगम का मिलेनियम बस डिपो यमुना नदी के तट पर या बाढ़ के मैदानी क्षेत्र में स्थित है। मामले का जब भी निर्णय करना हो तो मास्टर प्लान में संशोधन या बदलाव करना चाहिए, यदि यह संभव हो। पीठ ने कहा- हम दिल्ली विकास प्राधिकरण को मास्टर प्लान में बदलाव की अनुमति देना उचित समझते हैं, यदि इसकी अनुमति हो और डिपो किसी अन्य काम के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि हरित अधिकरण यह पाता है कि यह नदी का किनारा है तो मामला यहीं खत्म हो जाता है, यदि यह बाढ़ वाला मैदान है तो मास्टर प्लान में संशोधन करना होगा। अदालत ने परिवहन विभाग से कहा है कि डिपो में खड़ी क्लस्टर बसों को चार फरवरी तक हटाया जाए। अदालत ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि परिवहन निगम ने इस डिपो का कब्जा दिल्ली परिवहन विभाग को सौंप दिया है और डिपो तीन व चार को भी विभाग को सौंपने की व्यवस्था की जा चुकी है।

पीठ ने कहा कि बयानों के मद्देनजर याचिका में कुछ नहीं बचा और इसलिए उसका निस्तारण किया जाता है। मिलेनियम डिपो 50 एकड़ क्षेत्र में फैला है जिसे 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान अस्थाई डिपो के रूप में शुरू में नदी के किनारे बनाया गया था। इसमें करीब 1000 बसों को खड़ा करने की सुविधा के साथ ही पांच वर्कशाप और स्कैनिंग केंद्र, एक लाजिस्टिक केंद्र और दो सीएनजी स्टेशन भी हैं। शीर्ष अदालत ने पिछले साल कहा था कि इस बस डिपो को ढहाने का आदेश देना उचित नहीं होगा। उसने दिल्ली सरकार व दिल्ली परिवहन निगम को एक साल का वक्त दिया था ताकि 2021 का मास्टर प्लान संशोधिन किया जा सके। ऐसा नहीं होने की स्थिति में यमुना नदी के तट पर बने इस डिपो को अन्यत्र ले जाना होगा। अदालत ने कहा था कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को अक्तूबर, 2015 में दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में छह महीने के भीतर संशोधन, यदि कानून में इसकी अनुमति हो, करने का अवसर दिया था।

हाई कोर्ट ने निजामुद्दीन पुल के निकट और आइपी पावर स्टेशन के पीछे इस डिपो को अन्यत्र ले जाने के लिए निर्धारित समय सीमा आगे बढाने से इनकार कर दिया था। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 2010 में इस डिपो को अस्थाई रूप से बसें खड़ी करने के लिए निर्माण की अनुमति दी गई थी। दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन निगम ने मिलेनियम बस डिपो स्थल की भूमि के उपयोग में बदलाव के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण से अनुरोध करने को छह महीने का समय देने की याचिका निरस्त करने के निर्णय को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 20 अक्तूबर, 2015 को परिवहन निगम की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि डिपो को स्थानांतरित करने का आश्वासन देने के बाद अब समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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