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अमर सिंह बोले- अखिलेश यादव पर ‘अंकल सिंड्रोम’ हावी नहीं होने दूंगा

‘जो भी व्यक्ति नेताजी (मुलायम) के करीब है, वह मेरा अपना है। आजम खां जो मेरी आलोचना कर रहे हैं, वह तर्कसंगत होगी और मैं उसका सम्मान करता हूं।’

लखनऊ | June 15, 2016 5:41 AM
समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सदस्य अमर सिंह। (पीटीआई फाइल फोटो)

छह साल के लंबे अंतराल के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) में वापसी करने वाले अमर सिंह का कहना है कि वह अपनी सीमाएं जानते हैं और राजनीति व पारिवारिक रिश्तों के बीच संतुलन रखते हुए वे अपने भतीजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर ‘अंकल सिंड्रोम’ हावी नहीं होने देंगे।

सिंह ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘अपनी दूसरी पारी में मैं राजनीति और पारिवारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाऊंगा। इसका मतलब यह है कि अखिलेश जहां एक ओर मेरे भतीजे हैं, वहीं दूसरी ओर वह राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। मैं अखिलेश पर अंकल सिंड्रोम हावी नहीं होने दूंगा।’ उन्होंने कहा ‘मैं सपा के अघोषित मार्गदर्शक मंडल का सदस्य हूं। यह सक्रिय होगा या निष्क्रिय रहेगा, यह हमारे नए नेता अखिलेश पर निर्भर करेगा। मेरे पास शिकायत की कोई वजह नहीं है। मैं अपनी पारी खेल चुका हूं। अब मैं ज्यादा धैर्य और सहजता से काम लूंगा।’

सपा के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य ने कहा कि वह अतिउत्साह में कोई काम नहीं करेंगे और कभी भी मुख्यमंत्री को अपनी छाया में लेने की कोशिश नहीं करेंगे। वह अब ताकत की सियासत करने या कोई पद लेने के इच्छुक नहीं हैं। कभी सपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे सिंह का प्रभाव तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के लगभग हर फैसले में नजर आता था। उस दौर में वह सपा के सबसे ताकतवर नेता माने जाते थे। सिंह ने कहा कि पिछले साल के दौरान सपा में शक्ति का हस्तांतरण हुआ है। मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश यादव सपा के नेता हैं।

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां द्वारा अपनी आलोचना किए जाने पर सिंह ने कहा, ‘जो भी व्यक्ति नेताजी (मुलायम) के करीब है, वह मेरा अपना है। आजम खां जो मेरी आलोचना कर रहे हैं, वह तर्कसंगत होगी और मैं उसका सम्मान करता हूं।’ यह पूछे जाने पर कि क्या 2017 के विधानसभा चुनाव में वह ठाकुर बिरादारी को सपा के पक्ष में एकजुट करेंगे, सिंह ने कहा कि वह किसी जाति विशेष के नेता नहीं बनना चाहते। सिंह ने कहा, ‘उस समय ठाकुर बिरादरी के जो लोग मेरे पीछे थे, वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पौत्र रविशंकर सिंह पप्पू को विधान परिषद सदस्य का टिकट दिलाना चाहते थे। इसके लिए जब मैंने जोर डाला तो सपा के कुछ नेताओं से मेरी तल्खी हो गई थी। यही बात पार्टी नेतृत्व और मेरे बीच रिश्ते खराब होने का कारण बनी थी, लेकिन अब समय और परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब वे ठाकुर मित्र मेरे आसपास नजर नहीं आते।’

बॉलीवुड अदाकारा और पूर्व सांसद जया प्रदा के साथ अपने संबंधों के बारे में सिंह ने कहा कि वह हमेशा किसी साए की तरह उनके पीछे खड़ी रहीं। उन्होंने कहा, ‘यह आश्चर्यजनक है कि जया जी मेरे राज्यसभा नामांकन से खुश हैं। मैं इस बात से दुखी हूं कि अपनी लाख कोशिशों के बावजूद मैं उन्हें कहीं समायोजित नहीं करा सका। उन्होंने मेरी वजह से कांग्रेस और भाजपा को इनकार कर दिया। उन्होंने मेरे लिए अपना राजनीतिक करियर कुर्बान कर दिया। मुझे अपनी सीमाएं पता हैं। मैं अब सपा में नीति निर्माता नहीं रहा और मुझमें अपने साथ खड़े रहे लोगों के उचित समायोजन की सिफारिश करने की क्षमता भी नहीं रह गई है।’ सिंह ने कहा कि उन्होंने सपा मुखिया की वजह से राज्यसभा का नामांकन स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ‘मैं मुलायम जी के दिल में हूं, जो बड़ी बात है। मैं इसके लिए सदा उनका आभारी रहूंगा।’

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