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अलवर लोकसभा सीट: राजा और बाबा में रोचक जंग

भाजपा ने अलवर सीट पर कब्जा जमाने के लिए अब एकजुट लड़ाई छेड़ दी है। भाजपा के लिए आरएसएस का पूरा तंत्र भी सक्रिय हो गया है। बाबा बालकनाथ इलाके के लिए नए हैं।

Author May 2, 2019 2:58 AM
जितेंद्र सिंह और महंत बालकनाथ

राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गई है। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व राजघराने के जितेंद्र सिंह को अलवर में भाजपा के बाबा महंत बालकनाथ से तगड़ी चुनौती मिल रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अलवर संसदीय क्षेत्र में भाजपा के बाबा और कांग्रेस के पूर्व राजा के बीच रोचक चुनावी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस के जितेंद्र सिंह केंद्र में मंत्री रहे हैं और राहुल गांधी के सबसे करीबी हैं। इस कारण कांग्रेस ने अलवर सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। भाजपा ने इलाके में यादव जाति के मतदाताओं की संख्या ज्यादा देखते हुए इस वर्ग के महंत बालकनाथ को उम्मीदवार बनाया है। महंत बालकनाथ को योग गुरु रामदेव की सिफारिश पर भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। बालकनाथ की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा में नाराजगी भी पनपी थी पर अब नरेंद्र मोदी के नाम पर नाराज नेताओं को चुप्पी साधनी पड़ रही है। बालकनाथ मूल रूप से हरियाणा के हैं।

कांग्रेस के जितेंद्र सिंह इलाके में अपने विकास कामों का भी हवाला दे रहे हैं। पूर्व राजघराने के जितेंद्र सिंह की राहुल गांधी से करीबी के कारण पार्टी में प्रदेश स्तर पर एक धड़ा उनके खिलाफ भी है। कांग्रेस को इलाके के गैरयादवों का आसरा है। अलवर में मेव मुसलमानों के साथ मीणा जाति की भी बहुलता है। मेव समुदाय से भी एक उम्मीदवार मैदान में होने से जितेंद्र सिंह को वोट कटने का खतरा है। इसे लेकर ही अब कांग्रेस ने मेव मुसलमानों एकजुट करने की रणनीति अपनाई है। जितेंद्र सिंह का कहना है कि भाजपा इलाके के विकास के बजाय भावनाओं के सहारे चुनाव जीतना चाहती है। इसके लिए उसने कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं।

अलवर में अब तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। लोकसभा के 2014 के चुनाव में इस इलाके से मौजूदा भाजपा उम्मीदवार बालकनाथ के गुरु महंत चांदनाथ ने चुनाव जीता था। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के करण सिंह यादव सांसद बन गए थे। उससे पहले के 2004 और 2009 के चुनाव में जितेंद्र सिंह अलवर से लोकसभा के सदस्य बन चुके हैं। इलाके में प्रचार का ज्यादा शोर नहीं है। राहुल गांधी ने अलवर के लिए विशेष तौर पर पार्टी के कई नेताओं को प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी जितेंद्र सिंह की मदद के लिए अपने गुर्जर समाज में विशेष अपीलें कर रहे हैं। इसके साथ ही यादव समाज में भी कांग्रेस ने कई नेताओं को लगाया है। कांग्रेस के जितेंद्र सिंह ने 2009 में केंद्र में मंत्री रहते हुए कई विकास काम करवाए थे। जितेंद्र अपनी सभाओं में अब इन्हीं कामों को पूरा करवाने का भरोसा जता रहे हैं। इसके साथ ही उनकी छवि भी साफ-सुथरी है।

भाजपा ने अलवर सीट पर कब्जा जमाने के लिए अब एकजुट लड़ाई छेड़ दी है। भाजपा के लिए आरएसएस का पूरा तंत्र भी सक्रिय हो गया है। बाबा बालकनाथ इलाके के लिए नए हैं। किसी गुट में नहीं होने का उन्हें फायदा भी मिल रहा है। भाजपा की हर सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम की गूंज ही चल रही है। भाजपा के विधायक संजय शर्मा का कहना है कि चुनाव तो सिर्फ मोदी ही लड़ रहे हैं। इलाके में राष्ट्रवाद की लहर बह रही है। अलवर जिला देश भर में गोतस्करी के लिए जाना जाता रहा है। भाजपा की पूर्व राज्य सरकार ने इस पर लगाम लगाने की कठोर कार्रवाई की थी पर अब कांग्रेस सरकार इसमें ढिलाई बरतर रही है। अलवर में 2009 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के जितेंद्र सिंह ने 1 लाख 56 हजार 619 वोटों के अंतर से हरा कर जीता था। भाजपा के महंत चांदनाथ ने 2014 का चुनाव कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को 2 लाख 81 हजार 395 वोटों के भारी अंतर से हरा कर जीता था। महंत चांदनाथ के निधन के बाद 2018 में हुए उपचुनाव में बाजी पलट गई और कांग्रेस के करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत यादव को 1 लाख 96 हजार 496 वोटों के अंतर से जीत लिया था। इस उपचुनाव के नतीजों को लेकर ही कांग्रेस उत्साहित है।

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