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Alwar Gangrape Case: कार्रवाई के लिए चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रही थी राजस्थान पुलिस, वोटिंग के बाद हुई गिरफ्तारी

अलवर गैंगरेप मामले की जांच में देरी को लेकर राजस्थान पुलिस पर अब सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घटना 26 अप्रैल की लेकिन एफआईआर 30 अप्रैल को दर्ज की गई और 7 दिन बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। आरोप है कि चुनाव के कारण पुलिस ने इस मामले में देरी की।

Author May 11, 2019 4:49 PM
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राजस्थान के अलवर में दलित महिला से गैंगरेप मामले में सात दिन बाद पहली गिरफ्तारी हुई। बता दें कि यहां पति के सामने ही पांच लोगों ने महिला के साथ गैंगरेप किया था। बताया जा रहा है कि सात दिनों के अंदर आरोपियों ने पीड़िता के परिवार को बार-बार धमकी दी और 10 हजार रुपए की मांग करते हुए, सोशल मीडिया पर गैंगरेप का वीडियो शेयर करने की धमकी भी दी। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता और उसके परिवार को ​​कहा कि उन्हें कार्रवाई के लिए इस क्षेत्र में मतदान समाप्त होने तक इंतजार करना होगा। बता दें कि अलवर में 6 मई को चुनाव हुए थे और उसके एक दिन बाद ही पुलिस ने पहली गिरफ्तारी की।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 30 अप्रैल (जिस दिन गैंगरेप की घटना रिपोर्ट हुई) और 7 मई (जब पहली गिरफ्तारी हुई) के बीच पुलिसिया कार्रवाई में काफी खामियां पाई गई। महिलाओं और दलितों के साथ होने वाले क्राइम में एफआईआर दर्ज करने और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने में देरी करना आदि पैमानों पर काफी अंतर दिखा। गैंगरेप के बाद अलवर के एसपी राजीव पचार को हटा दिया गया और स्थानीय एसएचओ को भी निलंबित कर दिया गया। इन सबके बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले की जांच और निगरानी के लिए विशेष टीम बना दी गई है।

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महिला के पिता के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि आरोपी पास के ही एक गांव में हैं और पार्टी कर रहे हैं। अगले दो दिनों तक हमने पुलिस से कहा कि हमने सुना कि आरोपी पास के ही गांव में थे लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने हमें बताया कि चुनाव खत्म होने तक इंतजार करना चाहिए। बता दें कि इस मामले की पुलिस को सूचना दिए जाने के तीन दिन बाद 2 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई। 2 और 3 मई को पीड़िता के मेडिकल परीक्षण पूरे होने के बाद भी न तो उसका बयान दर्ज किया गया और न ही अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।

बता दें कि 26 अप्रैल को अलवर-थानागाजी राजमार्ग पर पांच बाइक सवार लोगों ने एक जोड़े को जबरन अगवा कर लिया और उन्होंने महिला के पति के सामने ही उसका गैंगरेप किया। इस गैंगरेप का वीडियो बनाने के बाद लोगों ने जोड़े से 2000 रुपए भी छीन लिया। शिकायतकर्ता के बहनोई के अनुसार, आरोपियों ने 28 अप्रैल को उसके पति को फोन कर 10 हजार रुपए की मांग की। इस दौरान लोगों ने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वे वीडियो को शेयर कर देंगे।

पीड़ित परिवार ने बताया कि वे वारदात के बाद थाना गाजी पुलिस स्टेशन में पहली बार में प्राथमिकी दर्ज नहीं करा सके। इसके बाद वे 30 अप्रैल को अलवर एसपी के कार्यालय गए इस दौरान उनके उनके साथ थाना गाजी के विधायक कांति प्रसाद भी थे। लेकिन 30 अप्रैल या 1 मई को भी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पीड़ित के जीजा ने कहा कि एसपी ने हमारे शिकायत को पढ़ा, उस पर अपनी टिप्पणी लिखी और हमें थानागाजी पुलिस स्टेशन जाने के लिए कह दिया। इसके बाद हम शाम को थाना गाजी पहुंचे, जहां हमारे मामले के बारे में सुना गया और मेरे भाई को रात में ही पुलिस स्टेशन में रुकने के लिए कहा गया। वहां बताया गया कि पुलिस अब छापेमारी करेगी लेकिन आरोपियों की पहचान करने की जरूरत होगी। हालांकि फिर भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और मेरा भाई 1 मई की दोपहर गांव वापस लौट आया।

जब यौन उत्पीड़न का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो शिकायतकर्ता के बहनोई ने बताया कि जब हम लोग वीडियो के बारे में पुलिस के पास गए तो वहां उन्हें बताया गया कि चुनाव के कारण कुछ पुलिसकर्मी ही उपलब्ध हैं इसलिए आप लोगों को अलवर जाना चाहिए। इसके बाद तीन दिन बाद गैंगरेप मामले में पहली गिरफ्तारी 7 मई को दौसा लोकसभा सीट पर चुनाव संपन्न होने के बाद की गई, जिसमें से थाना गाजी एक विधानसभा क्षेत्र भी आता है। प्रशासन से लेकर पुलिस तक सभी ने माना कि चुनाव प्रक्रिया के चलते केस में देरी हुई है।

इस मामले में थाना गाजी विधायक कांति प्रसाद मीणा ने कहा कि “यह सच नहीं है कि चुनावों के कारण मामला ढका गया था। पीड़ित परिवार ने शुरू में इस घटना के बारे में नहीं बताया। वे 30 अप्रैल को मेरे पास आए और मुझसे कहा कि उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। मैं उन्हें एसपी के कार्यालय में ले गया, जिन्होंने एसएचओ को मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया। एसएचओ ने भी दो दिन की कोशिश की, लेकिन चुनाव का समय था। बता दें कि विधायक ने पिछले साल कांग्रेस के बागी के रूप में विधानसभा चुनाव जीता और अब उन्होंने कांग्रेस सरकार को समर्थन देने का वादा किया है।

मामले में जयपुर आईजीपी एस सेंगाथिर ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने में दो दिन की देरी हुई, यह गलत है, ऐसा नहीं हुआ है। हमने एसएचओ को निलंबित कर दिया है और पूछताछ जारी है। उन्होंने बताया कि शनिवार से मंगलवार तक अवकाश के कारण अदालत बंद थी, जिसके चलते पीड़ितों के बयान दर्ज करने में देरी हुई।

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