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महात्‍मा गांधी ने की थी जिसकी स्‍थापना, फंड की कमी के चलते बंद होने वाला है वह स्‍कूल

राष्ट्रीय शाला 1 फरवरी 1921 को शुरू किया गया था और इसका संविधान महात्मा गांधी ने खुद लिखा था। बच्चों को राष्ट्र निर्माण के आदर्शों की शिक्षा देने के उद्देश्य से गांधी जी ने यह स्कूल शुरू किया था। गांधी जी अक्सर इस स्कूल में प्रार्थना करते थे और 1939 में स्वाधीनता संग्राम के दौरान उन्होंने यहां व्रत भी रखा था।

राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (फाइल फोटो)

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं, इसी बीच खबर यह भी है कि गुजरात के अहमदाबाद में 97 वर्ष पूर्व जिस स्कूल की बुनियाद गांधी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए रखी थी, वह बंद होने की कगार पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फंड की कमी के चलते राष्ट्रीय शाला नाम का स्कूल आखिरी सांसें ले रहा है। गांधी जी ने 1921 में गुजरात विद्यापीठ के साथ राष्ट्रीय शाला की स्थापना की थी। टीओआई की खबर के मुताबिक कक्षा 1 से 7 तक के इस स्कूल में महज 37 बच्चे ही बचे थे जिन्होंने कहीं और दाखिला ले लिया है। राष्ट्रीय शाला से ठीक 2 किलीमीटर की दूरी पर अल्फ्रेड हाई स्कूल है, जिसे विश्वस्तरीय संग्रहालय में तब्दील किया गया है और इसी 30 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसका उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रीय शाला 1 फरवरी 1921 को शुरू किया गया था और इसका संविधान महात्मा गांधी ने खुद लिखा था। बच्चों को राष्ट्र निर्माण के आदर्शों की शिक्षा देने के उद्देश्य से गांधी जी ने यह स्कूल शुरू किया था। गांधी जी अक्सर इस स्कूल में प्रार्थना करते थे और 1939 में स्वाधीनता संग्राम के दौरान उन्होंने यहां व्रत भी रखा था।

कहा जाता है कि दक्षिण अफ्रीका से लौटने बाद गांधी जी ने महसूस किया कि अग्रेजों की शिक्षा गुलामी की जड़ है और इस प्रकार शिक्षण प्रणाली को बदले जाने की आवश्यकता देखते हुए और आजादी की लड़ाई के लिए बच्चों को तैयार करने के लिए उन्होंने यह स्कूल शुरू किया था। स्कूल के लिए चंदे के रूप में फंड आ रहा था, उसमें कमी होने लगी तो राष्ट्रीय शाला ट्रस्ट ने एक बुकलेट बनाकर फंड जुटाने की अपील की। नियमित आय का एकमात्र जरिया स्कूल परिसर की किराये पर उठी कुछ जगहें बचीं।

राष्ट्रीय शाला ट्रस्ट का कहना है कि सरकारी नियमों के हिसाब से प्राइमरी स्कूल और म्यूजिक स्कूल को चलाने के लिए लिए संस्थान को अनुदान नहीं मिल रहा है। बुकलेट में कहा गया है कि गांधीवादी विचारधारा पर संस्थान चलाने के लिए हर साल 25 से 30 लाख रुपये की जरूरत है। मैनेजिंग ट्रस्टी और जनरल सेक्रेटरी जीतू भट्ट ने मीडिया को बताया, ”हमें स्कूल चलाने के लिए हर वर्ष 8.3 लाख रुपये की जरूरत है लेकिन हमारे पास फंड नहीं है। हमारे पास स्कूल को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

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