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सीबीआइ कोे सौंप दी गई बुलंदशहर कांड की जांच

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार को झटका देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले में सीबीआइ जांच के आदेश दिए और कहा कि वह अब तक की पुलिस जांच से ‘संतुष्ट नहीं’ है।

Author इलाहाबाद | August 13, 2016 5:01 AM

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार को झटका देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले में सीबीआइ जांच के आदेश दिए और कहा कि वह अब तक की पुलिस जांच से ‘संतुष्ट नहीं’ है। इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि उसका ‘इस मामले की जांच की निगरानी का’ इरादा है।

मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। राज्य सरकार ने शुक्रवार को इस घटना की जांच पर एक स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी। अदालत ने कहा, ‘हम संतुष्ट नहीं हैं, न तो जिस तरह से जांच होती दिख रही है और न ही सामग्री से जो रिकार्ड में ली गई है।’

अदालत ने राज्य सरकार को अपराध के संबंध में दर्ज प्राथमिकी, बलात्कार पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान 17 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख तक पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले की सुनवाई की पहली तारीख आठ अगस्त को दिए गए पिछले आदेश के अनुसार स्थिति रिपोर्ट में उपलब्ध कराई गई सामाजिक पृष्ठभूमि, आपराधिक रिकार्ड और अगर है तो राजनीतिक संबंध के बारे में जानकारी को लेकर असंतुष्टि जताई।

खास बात यह है कि अदालत ने शुरुआत में साफ कर दिया था कि उसका इरादा ‘इस मामले की जांच की निगरानी’ करने का है, जनहित याचिका के रूप में सुने जा रहे मामले को निपटाने का नहीं। यह घटना उस समय हुई थी जब नोएडा के एक परिवार के छह सदस्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जा रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुलंदशहर से गुजरते वक्त अपराधियों ने उनकी कार रोककर 13 साल की लड़की और उसकी मां को कार से बाहर खींचकर पास के एक खेत में ले जाकर उनका बलात्कार किया था।

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