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कृषि विश्वविद्यालय कर्मियों की समस्‍याओं का हरसंभव निदान किया जाएगा: सुधाकर सिंह

राज्य के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने गुरुवार की दोपहर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में एक सेमिनार का उद्घाटन किया।

कृषि विश्वविद्यालय कर्मियों की समस्‍याओं का हरसंभव निदान किया जाएगा: सुधाकर सिंह
कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में भाषण देते हुए कृषि मंत्री सुधाकर सिंह।

इसके बाद उन्‍होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के साथ संयुक्त रूप से विशेष बैठक की और बारी- बारी से उनकी समस्याओं को सुना और हर संभव निदान करने का आश्‍वासन दिया। इस दौरान उन्‍होंने कहा सरकारी क्षेत्र में कुल आवादी की महज दो फीसदी लोगों को ही नौकरी देना संभव है।

शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ.आरबी वर्मा ने कहा विश्वविद्यालय में शिक्षकों को समय पर प्रोन्नति मिले। पुरानी पेंशन को फिर से लागू किया जाए। इसके अतिरिक्त रिसर्च कंटीजेंसी की राशि बढ़ाई जाय। ताकि शोध कार्यों को बेहतर ढंग से किया जा सके।

नन टीचिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे संजय मिश्रा ने कहा कि दिन प्रतिदिन सेवानिवृत्ति के कारण विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है। अब महज दस फीसदी कर्मचारी शेष रह गए हैं। जिनके ऊपर कार्य का काफी दबाव आ गया है। बावजूद कर्मचारी शैक्षणिक एवं शोध कार्य में पूरी तन्मयता से काम कर रहे हैं। इसके बाद भी समय पर कर्मचारियों को संवर्गीय प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल रहा है।

जब कि राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में पूर्व से तकनीकी प्रोन्नति का लाभ कर्मचारियों को मिलता रहा है। यह लाभ यहां के कर्मचारियों को भी दिया जाए और पुरानी पेंशन प्रक्रिया को लागू किया जाए। इसके अतिरिक्त शिक्षकों और वैज्ञानिकों की भांति उत्कृष्ट कार्य करने वाले नॉन टीचिंग स्टाफ को भी अवार्ड दिया जाए। ताकि उनका भी कार्य के प्रति मनोबल बढ़ा रहे।

वहीं बैठक में छात्रों ने भी अपनी समस्याएं सुनाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से राज्य सरकार कृषि विभाग में कोई रिक्तियां नहीं निकाली है। आईसीएआर से मान्यता प्राप्त कॉलेजों से हम लोग डिग्री हासिल कर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। छात्र राजभवन मिश्रा ने कहा कि यूजी-पीजी के छात्रों को मिल रही छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाई जाए और कृषि शिक्षा को तकनीकी शिक्षा का दर्जा दिया जाए।

कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने सभी की समस्याओं को सुनने के बाद इसके समाधान की दिशा में हर संभव प्रयास का भरोसा दिया। उन्होंने छात्रों को कहा कि नौकरी देने की दिशा में हमारी सरकार तत्पर है। नौकरी देने की प्रक्रिया को पूरा करने वाली हमारे यहां जो एजेंसियां हैं उसकी भी क्षमता कम है उसे भी अपडेट किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरी कुल आबादी की महज दो फीसद लोगों को ही देना संभव है।

निश्चित रूप से विश्वविद्यालय ज्ञान का केंद्र है। तक्षशिला से लेकर विक्रमशिला जैसी 7 विश्वविद्यालय अखंड भारत का हिस्सा रहा है। पहले भारत के बाहर कोई भी विश्वविद्यालय नहीं था। देश दुनिया से लोग यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे। कृषि मंत्री ने कहा कि हम और कॉलेज बनाएंगे। कौशल विकास सेंटर खोलेंगे, ताकि लोग ज्ञान अर्जित कर रोजगार का सृजन कर सकें। इसके लिए हम पूरा सिस्टम बदलेंगे।

बैठक के अंत में उन्होंने मोटा अनाज पर रचित एक बुलेटिन का भी विमोचन किया। इस विशेष बैठक में कुलपति डॉ अरुण कुमार ने कृषि मंत्री के प्रति आभार जताते हुए विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र- छात्राओं के हित में किए जा रहे कार्यों को विस्तार से रखा। इस अवसर पर 24वीं शोध परिषद की बैठक में आमंत्रित विशिष्ट अतिथि सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, शिक्षक, नन टीचिंग स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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First published on: 30-09-2022 at 06:51:21 am
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