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डॉक्टर ने 20 साल में कर दिए सौ खून, घड़ियालों के खाने के लिए फेंक देता था शव, क्लिनिक भी चलाता रहा

साल 1994 में देवेंद्र ने अपनी बचत के करीब 11 लाख रुपए निवेश कर एक गैस एजेंसी की डीलरशिप ले ली। लेकिन जिस कंपनी की देवेंद्र ने डीलरशिप ली थी, वह कंपनी भारत फ्यूल रातों रात बंद होकर निवेशकों का पैसा लेकर गायब हो गई।

crime news aligarh news delhi policeहत्यारा पैरोल मिलने के बाद से गायब हो गया था, जिसे पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली पुलिस ने बीती 28 जुलाई को एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह अपराधी 62 साल का एक बुजुर्ग है और पेशे से एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रहा है लेकिन इसके गुनाहों की लिस्ट इतनी लंबी है कि यकीन करना मुश्किल है। बता दें कि इस डॉक्टर ने 100 से ज्यादा लोगों का कत्ल किया है। इतना ही नहीं इस खूंखार अपराधी ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए हत्या के बाद शव कासगंज की हाजरा नहर में घड़ियालों को खिला दिए। इतना ही नहीं यह अपराधी लोगों की किडनी निकालकर उन्हें बेचने के काम में भी जुड़ा रहा।

बता दें कि इस खूंखार अपराधी का नाम देवेंद्र शर्मा है। देवेंद्र अलीगढ़ के नजदीक एक गांव का रहने वाला है। देवेंद्र ने साल 1984 में 26 साल की उम्र में बीएएमएस की डिग्री हासिल कर राजस्थान के बंदीकुई इलाके में अपना क्लीनिक शुरू किया था। देवेंद्र ने करीब एक दशक तक इस क्लीनिक को चलाया और आसपास काफी प्रसिद्ध भी हो गया था।

साल 1994 में देवेंद्र ने अपनी बचत के करीब 11 लाख रुपए निवेश कर एक गैस एजेंसी की डीलरशिप ले ली। लेकिन जिस कंपनी की देवेंद्र ने डीलरशिप ली थी, वह कंपनी भारत फ्यूल रातों रात बंद होकर निवेशकों का पैसा लेकर गायब हो गई। इससे देवेंद्र आर्थिक परेशानी से घिर गया और शायद इसी परेशानी ने देवेंद्र के अंदर के राक्षस को जगा दिया।

इसके बाद देवेंद्र अपने गांव वापस लौटा और उसने एक फर्जी गैस एजेंसी खोली। शुरुआत में देवेंद्र ने लखनऊ से गैस सिलेंडर मंगवाए। इस दौरान वह उसके गांव के नजदीक एक अन्य गांव में रहने वाले राज, उदयवीर और वेदवीर के संपर्क में आया। इसके बाद इन सभी ने मिलकर एलपीजी सिलेंडर ले जाने वाले ट्रकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ये लोग ट्रक ड्राइवर की हत्या कर ट्रक लूट लेते थे और सिलेंडर अपनी गैस एजेंसी में ट्रांसपोर्ट कर देते थे। सबूत मिटाने के लिए ये लोग ट्रक को काटकर कबाड़ में बेच देते थे और ट्रक डाइवर के शव को कासगंज की हाजरा नहर में फेंक देते थे, जहां मौजूद घड़ियाल सबूत की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ते थे।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र शर्मा को दो साल बाद गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन हत्या के सबूत नहीं मिलने के कारण देवेंद्र को सिर्फ गैरकानूनी गैस का व्यापार करने के मामले में दोषी ठहराया जा सका। कुछ समय बाद जेल से छूटने के बाद देवेंद्र ने फिर से अपराध की राह पकड़ ली और इस बार वह और गैंग टैक्सी ड्राइवर्स को निशाना बनाने लगा। ये लोग दिल्ली से यूपी की विभिन्न जगह के लिए टैक्सी ड्राइवर बुक करते थे और फिर रास्ते में टैक्सी ड्राइवर की हत्या कर गाड़ी को बेच देते थे।

इसके बाद शर्मा अवैध किडनी कारोबार में भी शामिल हो गया। हालांकि 2004 में गिरफ्तारी के बाद शर्मा को जयपुर जेल भेज दिया गया, जहां 16 साल बिताने के बाद इसी साल जनवरी में उसे 20 दिन की पैरोल दी गई थी। हालांकि पैरोल का समय पूरा करने के बाद वापस जेल पहुंचने की बजाय शर्मा फरार हो गया।

इस दौरान वह कुछ समय अपने गांव में रहा। वहां से अपने एक रिश्तेदार के घर दिल्ली मोहन गार्डन पहुंचा और वहां ठहरा। इस दौरान शर्मा ने प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं एक एनजीओ के लिए काम करने वाली एक महिला से शादी भी कर ली थी। बीती 28 जुलाई को पुलिस ने देवेंद्र शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

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