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किसानों को हुए नुकसान की पड़ताल, CM ने लिखा मोदी को पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में उत्तर प्रदेश के सांसदों की बैठक में प्रदेश की सियासी फिजा के साथ केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच पहुंचाने पर चर्चा की लेकिन सांसदों ने अपनी तरफ से प्रधानमंत्री को प्रदेश में बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की कितनी जानकारी दी? यह यक्ष प्रश्न है। यक्ष प्रश्न इसलिए क्योंकि राज्य के 71 में से अधिकांश सांसद मौसम के बिगड़े मिजाज के बाद अपने संसदीय क्षेत्रों के गांवों तक पहुंच ही नहीं पाए हैं।

Author लखनऊ | March 17, 2016 2:15 AM
अखिलेश यादव

अपने संसदीय क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच बना पाने में भले ही भारतीय जनता पार्टी के सांसद नाकाम साबित हो रहे हों, लेकिन अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं के जरिये किसानों के घरों तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी की सरकार के चार साल पूरे होने पर राज्य भर में चलाई जा रही विकास यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री उन किसानों का सूरतेहाल जानना चाहते हैं जिन पर मौसम का बदला मिजाज कहर बन कर टूटा है। बीते दो दिनों में मुख्यमंत्री को जो रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक प्रदेश के तीस जिले ऐसे हैं जहां फौरी तौर पर किसानों को 30 फीसद का फसलीय नुकसान उठाना पड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में उत्तर प्रदेश के सांसदों की बैठक में प्रदेश की सियासी फिजा के साथ केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच पहुंचाने पर चर्चा की लेकिन सांसदों ने अपनी तरफ से प्रधानमंत्री को प्रदेश में बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की कितनी जानकारी दी? यह यक्ष प्रश्न है। यक्ष प्रश्न इसलिए क्योंकि प्रदेश के 71 में से अधिकांश सांसद मौसम के बिगड़े मिजाज के बाद अपने संसदीय क्षेत्रों के गांवों तक पहुंच ही नहीं पाए हैं। इन सांसदों में से अधिकांश को उनके प्रतिनिधियों ने फसलों को हुए नुकसान की जानकारी दी है।
उत्तर प्रदेश में वैसे भी दिसंबर से भारतीय जनता पार्टी नए अध्यक्ष की आस में दम साधे खड़ी है। नए अध्यक्ष की आस में कार्यकर्ता भी हैं। उधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने प्रत्येक कार्यकर्ता को निर्देश दिए हैं कि वह उन किसानों की बर्बाद हुई फसलों का ब्योरा एकत्र करें जिन पर मौसम का कहर टूटा है। अब तक जो आंकड़े जुटाए गए हैं उसके मुताबिक एक लाख 16 हजार हेक्टेयर गेहूं, और छह हजार हेक्टेयर सरसों की फसल के नुकसान का फौरी आकलन किया गया है।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरफ से किसानों को हुए नुकसान का रिपोर्ट मंगाने की बाबत पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि किसानों को नुकसान कितना हुआ? इसका आकलन विकास यात्रा में शामिल पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा गांवों में रह रहे कार्यकर्ताओं से भी कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार इस वर्ष को किसान वर्ष के तौर पर मना रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध करा दी जाए।

वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सूखाग्रस्त जिलों के लिए अरहर की दाल, खाद्य तेल, सहित कम से कम छह महीने के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने को कहा है। प्रधानमंत्री को 16 मार्च को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि केंद्र को खाद्य तेल उपलब्ध कराने में कठिनाई हो तो विकल्प के तौर पर दो किलो सरसों या तिल प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह की दर से आबंटित किया जाए।

फिलहाल उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे किसानों तक पहुंचने की कोशिश में अखिलेश यादव भाजपा से आगे हैं। बीते ढाई बरसों से प्रदेश में मौसम की मार झेल रहे किसानों तक पहुंच बनाने की लगातार कोशिश कर रहे मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के मुकाबिल होने में भाजपा को लंबा समय लगेगा।

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