सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने माघ मेले के दौरान बटुकों की चोटी खींचे जाने के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की हालिया टिप्पणी की निंदा की है। अखिलेश यादव ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर ब्रजेश पाठक इस घटना को लेकर इतने गंभीर हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अखिलेश ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि उपमुख्यमंत्री घटना के लगभग एक महीने बाद इस बारे में बात कर रहे हैं। पाठक ने हाल में एक बयान में कहा था कि बटुक ब्राह्मणों की चोटी खींचना एक गंभीर पाप है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल किया कि सनातन धर्म की रक्षक होने का दावा करने वाली सरकार में कोई ब्राह्मणों की चोटी कैसे खींच सकता है? अखिलेश ने कहा कि उपमुख्यमंत्री पाठक मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य होने के नाते या तो अपने समुदाय की गरिमा की रक्षा करें अथवा यदि वे ऐसा करने में असमर्थ हैं तो पद छोड़ दें।
धार्मिक हस्तियों का अपमान कर रही बीजेपी
अखिलेश यादव ने कहा, “यदि उन्हें वास्तव में लगता है कि कोई अन्याय हुआ है, तो उनके पास सरकार से इस्तीफा देने का विकल्प है।” सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि बीजेपी पूजनीय धार्मिक हस्तियों का अपमान कर रही है जबकि सनातन परंपरा में शंकराचार्यों का बहुत सम्मान किया जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे शासनकाल में भी लाठीचार्ज हुआ था। हमने इसे गलती माना, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की और जब मुझे मौका मिला, तो मैंने तत्कालीन शंकराचार्य से माफी मांगी और यह आश्वासन भी दिया कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।”
अखिलेश यादव ने कहा, “बीजेपी का व्यवहार स्पष्ट करता है कि वह किसी भी हद तक गिर सकती है।” सपा प्रमुख ने ये टिप्पणियां जनवरी में प्रयागराज में हुए माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद को लेकर की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान के लिए संगम की ओर जाने से रोके जाने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और बटुकों की चोटी खींची।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट से शुक्रवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। क्लिक कर पढ़ें खबर।
