उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को परिवारवाद के आरोप पर जवाब देते हुए कहा कि इसके अपने ही अलग फायदे हैं। साथ ही कहा कि उनकी पार्टी कभी इसलिए नहीं टूटी क्योंकि पार्टी में एक ही परिवार के पांच सांसद हैं।

सपा प्रमुख ने लखनऊ में सपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया कि विरोधियों ने पार्टी को तोड़ने की कोशिश की थी।

सवाल का जवाब देते हुए बोले अखिलेश

भाजपा के इस आरोप के बारे में एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव कहा, परिवाद के फायदों के बारे में भी सोचना चाहिए। सवाल था कि सपा एक ही परिवार से कई उम्मीदवारों को टिकट देकर राजनीति में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दे रही है।

‘परिवारवाद से क्या फायदा होता है’

अखिलेश ने कहा, “कभी-कभी आपको यह भी सोचना चाहिए कि परिवारवाद से क्या फायदा होता है।” आगे इस ओर इशारा किया कि हाल में लोकसभा में सुना गया कि सांसदों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी।

अखिलेश यादव ने सवाल किया, “कई पार्टियों में फूट पड़ी। क्या आपने कभी सोचा कि सपा में फूट क्यों नहीं पड़ी?” इसका खुद ही जवाब देते हुए कहा, “…क्योंकि इसके पांच सांसद एक ही परिवार से थे और हमारे कई मुस्लिम सांसद थे और कुछ पक्के समाजवादी थे। मैं कह रहा हूं कि कभी-कभी परिवादवाद के फायदे भी होते हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “सपा तोड़ने की कोई कोशिश नहीं की गई।”

ओमप्रकाश राजभर ने किया था दावा

इस साल जून में एनडीए की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि संसद में टीएमसी कांग्रेस के बाद सपा अगली विपक्षी पार्टी हो सकती है जिसमें फूट पड़ सकती है।

अखिलेश यादव के परिवार से कौन-कौन सांसद?

अखिलेश यादव अपने परिवार के जिन सांसदों की बात करते रहे थे उसमें वह खुद, कन्नौज से सांसद हैं, उनकी पत्नी डिंपल मैनपुरी से सांसद, उनके चचेरे चचेरे भाई आदित्य यादव बदायूं, अक्षय यादव फिरोजाबाद और धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से सांसद हैं।

अपने कोर वोट बैंक एमवाई यानी मुस्लिम-यादव को बनाए रखने और गैर-यादव ओबीसी वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में, अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी की 62 सीटों पर सिर्फ पांच यादव उम्मीदवारों उतारे। दिलचस्प बात यह है कि ये पांच उम्मीदवार उन्हीं के परिवार से हैं और सभी चुनाव जीते भी।

आदित्य, मुलायम के भाई और जसवंतनगर के विधायक शिवपाल यादव के बेटे हैं, जबकि अक्षय सपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव के बेटे हैं। राम गोपाल यादव मुलायम सिंह के चचेरे भाई हैं। धर्मेंद्र, मुलायम के भाई अभय राम के बेटे हैं, जो खुद राजनीति से दूर ही रहे।

सपा प्रमुख ने जिन मुस्लिम सांसदों का जिक्र किया, उनमें गाजीपुर के अफजल अंसारी, कैराना की इकरा चौधरी, संभल के जिया-उर-रहमान और रामपुर के मोहिबुल्लाह शामिल हैं। मोहिबुल्लाह को छोड़कर बाकी तीनों को अपने परिवारों से राजनीतिक विरासत मिली है।

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