Akhilesh Yadav Big Action: समाजवादी पार्टी (सपा) के गोरखपुर संगठन में शनिवार को सामने आए विवाद के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा फैसला लिया है। प्रेस क्लब में पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने के आरोपों के कुछ ही घंटों बाद अंशुमान सिंह को पार्टी से निष्कासित किया गया।
इसके अगले ही दिन रविवार को अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी समेत प्रदेश की सभी कार्यकारिणियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। इस कार्रवाई को सिर्फ शनिवार की घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही संगठनात्मक खींचतान पर नेतृत्व की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
गोरखपुर में विवाद के बाद सपा का बड़ा एक्शन
सपा के केंद्रीय कार्यालय से जारी पत्र के मुताबिक गोरखपुर जिला और महानगर कार्यकारिणी के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणियों के पदाधिकारी और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है, यानी पार्टी नेतृत्व ने कार्रवाई का दायरा केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं रखा।
इतने बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर अनुशासन और संगठन को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के बीच मंच पर ही हुआ विवाद
शनिवार को गोरखपुर में सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ कथित मारपीट और थप्पड़ मारे जाने की घटना ने पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया।
खास बात यह रही कि जिस मंच से लोकतंत्र और राजनीतिक मूल्यों की बात की जा रही थी, वहीं पार्टी नेताओं के बीच विवाद सामने आ गया। घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अंशुमान सिंह को निष्कासित कर दिया।
क्या लंबे समय से था संगठन में असंतोष?
गोरखपुर सपा में अंदरूनी खींचतान का यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय से स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद, टिकट की दावेदारी और शक्ति प्रदर्शन की खबरें सामने आती रही हैं। कैंपियरगंज विधानसभा सीट पर टिकट की दावेदारी को लेकर नेताओं और उनके समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन ने भी पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा था।
सितंबर में अखिलेश यादव ने गोरखपुर के दावेदारों और पूर्व प्रत्याशियों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान कैंपियरगंज की दावेदारी पर उन्होंने सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया था कि फिलहाल केवल चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी का नाम तय है।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने में करीब चार महीने के बाकी हैं, लेकिन उससे पहले सभी राजनीतिक दलों में सीट शेयरिंग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस को साफ संदेश दिया है। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में कांग्रेस या राहुल गांधी का जिक्र नहीं किया, लेकिन इशारों-इशारों में इतना जरूर कर दिया-“बात सीट की नहीं जीत की है।” पढ़िए पूरी खबर…
