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प्रियंका इफेक्ट : छोटी पार्टियों पर भी अखिलेश-माया की नजर, निषाद पार्टी-RLD को गठबंधन का हिस्सा बता बनाया यह प्लान

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मंथन शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्होंने छोटी-छोटी पार्टियों को भी अपने पाले में लाने की तैयारी कर ली है।

मायावती और अखिलेश यादव ( फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मंथन शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्होंने छोटी-छोटी पार्टियों को भी अपने पाले में लाने की तैयारी कर ली है। साथ ही, निषाद पार्टी और आरएलडी को भी गठबंधन का हिस्सा बताया है। इनके अलावा भी दोनों दलों ने कई समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है।

अखिलेश ने दिया यह बयान : लखनऊ में प्रियंका गांधी के रोड शो के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने फिरोजाबाद में कहा, ‘‘ये गठबंधन बीएसपी से तो है। वहीं, आपको तो जानकारी होगी कि कांग्रेस पार्टी भी शामिल है। आरएलडी को भी तीन सीटें दी गई हैं, वो भी शामिल है। और निषाद पार्टी को भी शामिल किया गया है, क्योंकि पहले हम उनके साथ चुनाव लड़ चुके हैं। आने वाले समय में कुछ लोकसभा में हमारे साथ रहेंगे और कुछ विधानसभा चुनाव में भी हमारे साथ रहेंगे।’’

नए समीकरण के हिसाब से बदलेंगे प्रत्याशी : सूत्रों का कहना है कि गठबंधन की घोषणा के बाद सपा और बसपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। कहा जा रहा है कि बीएसपी ने अपने हिस्से की सीटों पर प्रत्याशी भी तय कर दिए हैं। हालांकि, इनका ऐलान अभी नहीं किया गया है। फिलहाल प्रत्याशियों को व्यक्तिगत स्तर पर जनसंपर्क करने के लिए कहा जा चुका है। अब प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद नए समीकरणों को ध्यान में रखकर कई प्रत्याशियों के टिकट बदले जा सकते हैं।

गैर यादव-गैर जाटव पर फोकस : सूत्रों की मानें तो यूपी में प्रियंका इफेक्ट को भांपते सपा और बसपा टिकटों के बदलाव पर गहन मंथन कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बीएसपी ने पहले गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित फैक्टर को ध्यान में रखकर शुरुआती टिकट बांटे थे। आरक्षित सीटों पर सभी पार्टियां दलितों को ही टिकट देंगी, लेकिन सपा-बसपा की कोशिश है कि टिकट देते वक्त दलितों में भी गैर यादव और गैर जाटवों को अहमियत दी जाए।

सवर्ण-मुस्लिम बनेगा नया समीकरण : सूत्रों का कहना है कि मुस्लिम वोटों को अपने साथ लाना सपा-बसपा गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं, कुछ सवर्णों को भी अपने साथ लाने की कोशिश है। इसके लिए दोनों पार्टियां नया समीकरण मुस्लिम-सवर्ण बनाने की कोशिश कर रही हैं, जिसे टिकट वितरण के लिए ध्यान में रखा जाएगा। इन दोनों वर्गों को टिकट वितरण में तवज्जो देने की कोशिश होगी।

सर्वजन की अहमियत रहेगी बरकरार : बीएसपी का मानना है कि दलित और ओबीसी के अलावा मुसलमान व सवर्णों के वोट भी जरूरी है। यही वजह है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण का भी समर्थन किया।

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