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डूसू चुनावों में एबीवीपी की धमाकेदार जीत

मतगणना के छठे चरण के दौरान सचिव पद के चुनाव में उपयोग हुई एक ईवीएम में नोटा को मिलाकर नौ के स्थान पर दस उम्मीदवारों के मत प्रदर्शित हुए। एनएसयूआइ के छात्र नेता कुणाल सहरावत ने आरोप लगाया कि दसवें उम्मीदवारों को 40 मत दिखाए जा रहे हैं जबकि एनएसयूआइ के उम्मीदवार आकाश चौधरी के सामने शून्य आ रहा था।

Author September 14, 2018 3:24 AM
एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर कब्जा किया जबकि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) को सिर्फ सचिव पद से संतोष करना पड़ा।(फोटो सोर्स- ट्विटर)

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) पदाधिकारियों के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने धमाकेदार जीत दर्ज की। गुरुवार को घोषित हुए नतीजों में एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर कब्जा किया जबकि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) को सिर्फ सचिव पद से संतोष करना पड़ा। आॅल इंडिया स्डूटेंड्स एसोसिएशन (आइसा) और आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाइएसएस) का गठबंधन खाता नहीं खोल पाया। पिछले साल अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद एनएसयूआइ और सचिव व सह सचिव पद एबीवीपी के पास थे। बुधवार को हुए मतदान में 44.46 फीसद विद्यार्थियों ने मताधिकार का उपयोग किया था। चार पदों के लिए 23 उम्मीदवार मैदान में थे।

ईवीएम में गड़बड़ी, मतगणना के स्थगन की घोषणा, छात्रों में झड़प, तोड़फोड़ और नारेबाजी के बीच गुरुवार करीब पौने दस बजे घोषित हुए डूसू चुनाव के परिणामों में एबीवीपी के अंकिव बैसोया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनएसयूआइ के सन्नी छिल्लर को हराकर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। अंकिव को 20467 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के शक्ति सिंह ने एनएसयूआइ की उम्मीदवार लीना को हराकर उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। शक्ति को 23046 मत मिले। सचिव पद पर एनएसयूआइ के आकाश चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के सुधीर को हराया। आकाश को 20198 मत मिले। वहीं, सह सचिव पद पर एबीवीपी की ज्योति चौधरी ने जीत दर्ज की। ज्योति को 19353 मत मिले।

आइसा-सीवाइएसएस को मिली निराशा
साल 2015 की हार के बाद डूसू चुनाव में उतरी सीवाइएसएस को इस बार भी निराशा हाथ लगी। इस साल सीवाइएसएस का आइसा के साथ गठबंधन था। लेकिन यह गठबंधन डीयू के विद्यार्थियों पर अपना जादू चलाने में कामयाब नहीं रहा।

नोटा को 27 हजार से ज्यादा वोट
डूसू चुनाव में इस साल चार पदों पर नोटा (ऊपर वालों में से कोई नहीं) पर 27739 मत पड़े हैं। विद्यार्थियों ने सबसे अधिक नोटा सह सचिव पद पर दबाया है। इस पद पर नोटा को 8273 वोट मिले। पिछले साल सह सचिव पद पर 9 हजार से अधिक छात्रों ने नोटा का बटन दबाया था।

मतदान फीसद का दस साल का रिकॉर्ड टूटा
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में इस साल 44.46 फीसद विद्यार्थियों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया जबकि पिछले साल 42.80 फीसद मतदान हुआ था। साल 2014 के चुनाव में 44.40 फीसद मतदान हुआ था। जबकि पिछले दस सालों के दौरान 2011 में 32 फीसद मतदान हुआ था।

ईवीएम नौ की जगह दिखे जगह दस उम्मीदवार
मतगणना के छठे चरण के दौरान सचिव पद के चुनाव में उपयोग हुई एक ईवीएम में नोटा को मिलाकर नौ के स्थान पर दस उम्मीदवारों के मत प्रदर्शित हुए। एनएसयूआइ के छात्र नेता कुणाल सहरावत ने आरोप लगाया कि दसवें उम्मीदवारों को 40 मत दिखाए जा रहे हैं जबकि एनएसयूआइ के उम्मीदवार आकाश चौधरी के सामने शून्य आ रहा था।

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