सिख समुदाय के नेताओं ने मंगलवार को पटियाला सेंट्रल जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना से मुलाकात की। राजोआना को 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हुई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।

राजोआना से मिलने वालों में अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी शामिल थे।

राजोआना से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि अगर सरकार राजोआना के मामले में समय पर कोई फैसला नहीं लेती है तो ‘पंज सिंह साहिबान’ की बैठक बुलाई जाएगी ताकि राजोआना की भावनाओं के मुताबिक आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सके।

41 तारीखें तय हुई, कोई फैसला नहीं

गड़गज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से समय मिलने के बावजूद, केंद्र ने पिछले छह सालों में राजोआना के मामले में कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि 2019 से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 41 तारीखें तय की गई हैं लेकिन केंद्र ने कोई फैसला नहीं किया है।

गड़गज ने कहा कि केंद्र सरकार को राजोआना के लंबे समय से लंबित मामले का समाधान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजोआना का हौसला बुलंद था और वह पूरी तरह गुरु के प्रति समर्पित था। उन्होंने यह भी कहा कि राजोआना ने साफ कर दिया था कि वह झुकेगा नहीं और ‘शहादत को गले लगाने’ के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास और परंपरा में दर्ज है कि उन्होंने शहादत तो स्वीकार की लेकिन अपनी जान बचाने के बदले कभी भी शासकों के सामने घुटने नहीं टेके।

गड़गज ने कहा कि राजोआना भी इसी सिख परंपरा का पालन कर रहा है। गड़गज ने कहा कि केंद्र सरकार ने राजोआना के मामले में श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के मौके पर 2019 में जारी अपनी ही अधिसूचना को लागू नहीं किया है। उन्होंने कहा कि राजोआना ने जगतार सिंह हवारा के मौलिक अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई, जिसे अपनी बुजुर्ग और बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल तक नहीं दी जा रही है। हवारा भी 1995 में हुई बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

सिखों के साथ घोर अन्याय- गड़गज

अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि सरकारों का ऐसा बर्ताव सिखों के साथ घोर अन्याय है। ‘बंदी सिखों’ (सिख कैदियों) की रिहाई के लिए दो अक्टूबर को होने वाले मार्च के बारे में पूछे जाने पर गड़गज ने कहा कि जिस तरह एसजीपीसी ने ‘कौमी इंसाफ मोर्चा’ का समर्थन किया था, उसी तरह अकाल तख्त साहिब ने भी इसका पूरा समर्थन किया।

राजोआना ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि केंद्र सरकार उनकी दया याचिका पर तुरंत कोई फैसला करे। राजोआना की दया याचिका पिछले 15 सालों से लंबित है।

राजोआना ने अपने पत्र में कहा था कि वह पिछले 31 सालों से जेल में है और पिछले 20 साल उसने अपने मामले में अंतिम फैसले का इंतजार करते हुए मौत की सजा के साये में बिताए हैं।

सचिवालय के बाहर हुआ था धमाका

चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर 31 अगस्त, 1995 को हुए एक धमाके में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी। मार्च, 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने राजोआना की ओर से संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत दया याचिका दायर की थी।

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आम आदमी पार्टी की ओर से जेल में बंद सिख उग्रवादी जगतार सिंह हवारा की पैरोल पर अपना रुख बदलने के बाद पंजाब की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में सिख उग्रवादी कैदियों का मुद्दा फिर से उभर आया है। इससे राज्य में सिख समुदाय के वोटों की दिशा और चुनाव परिणाम पर गहरा असर पड़ सकता है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।