महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार हर बार जब बारामती जाते थे तो वह क्षेत्र के हर विकास के कामों की समीक्षा करते थे, इसमें वह सरकारी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है, जहां उनका पोस्टमॉर्टम हुआ।
बारामती में अजित पवार का बुधवार सुबह एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया। अजित वहां एक चुनावी रैली संबोधित करने जा रहे थे।
‘मेडिकल कॉलेज के कामों को वह खुद देखते थे’
बारामती तालुका के हेल्थ ऑफिसर डॉ. मनोज खोमाणे ने कहा, ऑडिटोरियम की कुर्सियों के रंग से लेकर हर एक विभाग के कामों की प्रगति का अजित दादा खुद मॉनिटरिंग करते थे, जिससे यह मेडिकल कॉलेज देश के अग्रणी मेडिकल कॉलेज में गिना जाए, अफसोस उस समय हमें यह बिल्कुल नहीं पता था कि एक दिन इसी संस्थान में उनके शरीर का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा, उनके पार्थिव अवशेषों को संरक्षित किया जाएगा और डीएनए के नमूने इकट्ठा किए जाएंगे।”
बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में अजित पवार का अंतिम संस्कार किया गया, वहीं मेडिकल कॉलेज के अधिकारी और चिकित्साधिकारी इस घटना से काफी दुखी दिखे।
घटना के दिन को डॉक्टर ने किया याद
डॉ मनोज ने घटना के दिन को याद करते हुए कहा उन्हें बुधवार सुबह करीब 08.47 बजे बारामती के उपमंडल कार्यालय (एसडीए) से एक अतिरिक्त एम्बुलेंस के लिए कॉल आया था।
आगे उन्होंने कहा, “वीआईपी प्रोटोकॉल के मुताबिक, हमारी एम्बुलेंस पहले से ही एअर फील्ड पर तैनात थी और हम पूरी उम्मीद के साथ घटनास्थल पहुंचे कि कोई अप्रिय घटना न घटी हो। सुबह 08.49 बजे तक कॉलेज के बाहर मौजूदा भीड़ बढ़ गई और कोई भी कुछ सुनने को तैयार नहीं था, हम सभी सदमे में थे।”
ऐसे की शवों की पहचान
हेल्थ डिपार्टमेंट की टीमें पुणे से बारामती के लिए रवाना हो चुकी थीं, ऐसे में शवों की पहचान करना सबसे पहला काम था। डॉ. खोमने ने बताया, वहां दो महिलाएं और तीन पुरुष थे, लेकिन पुलिस टीमों ने अजित पवार के शव की पहचान उनकी कलाई पर बंधी घड़ी से की गई। विदिप जाधव की कमरबंद पर लगी नेमप्लेट से पहचान की गई। तीसरा पुरुष शव पायलट की वर्दी में था।”
डॉ. मनोज खोमाने ने याद करते हुए कहा, “जब पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू हुई तो कमरे में मौजूद सभी की आंखे नम थीं।
हेल्थ टीमों पर था दबाव
पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बारामती के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश उमाप ने कहा कि उनकीं टीमें बहुत बिजी थी और अत्यधिक दबाव में थीं।
डॉ. राजेश ने कहा, “हमने शोक के इस माहौल में अपना काम किया और यह सुनिश्चित किया कि हर कदम सही तरीके से उठाया जाए। सांस की नली में किसी भी बाहरी वस्तु की जांत के लिए सबसे पहले सभी शवों को सीटी स्कैन किया गया और फिर पोस्टमार्टम किया गया।”
प्लेन क्रैश में शव बुरी तरह झुलस चुके थे और दुर्घटना के प्रभाव से शरीर में फ्रैक्चर भी पाए गए। पुणे स्थित फोरेंसिक लैब के एक्सपर्ट की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद थी और पुलिस के निर्देशानुसार दांत और जांघ की हड्डियों समेत डीएनए के नमूने एकत्र किए गए।
2019 में हुई स्थापना
बता दें कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बारामती की स्थापना 2019 में हुई थी। दावा किया जा रहा कि इस मेडिकल कॉलेज को अग्रणी बनाने के लिए अजित पवार ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। आगे पढ़िए ‘आपको कुछ नहीं होगा’, जब हेलीकॉप्टर यात्रा के दौरान घबराए अजित पवार से बोले थे फड़नवीस
