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Aiims में मरीजों की मुश्किलें अनेक

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पार्किंग दूर होने के कारण हजारों मरीजों को रोज मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं।

Author नई दिल्ली | February 2, 2016 3:55 AM
AIIMS का फाइल फोटो

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पार्किंग दूर होने के कारण हजारों मरीजों को रोज मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं। अमीरों को एम्स के मुख्य गेट के सामने मोटी रक म देकर गाड़ी खड़ी करने की सुविधा दी जाती है, लेकिन गरीब मरीजों को काफी दूर पैदल चलकर डॉक्टरों के पास आना पड़ता है। कहने को तो पार्किंग से मुख्य परिसर के बीच मुफ्त सीएनजी कैब चलाई जाती है, लेकिन इसका फायदा गिनती के मरीजों को मिलता है। इतना ही नहीं, एम्स में दिल्ली या केंद्र सरकार की ओर से जारी पार्किंग स्टीकर तक को मान्यता नहीं है।
यहां की सबसे तेज सेवा अगर कोई है तो वह है बिना एम्स के स्टीकर वाली गाड़ियां उठाने की सेवा।

गलती से अगर कोई अनजान तीमारदार अपनी गाड़ी कर्मचारियों के लिए आवंटित पार्किंग में खड़ी करके चला गया तो टो सर्विस की गाड़ियां बिना देरी के वो गाड़ी उठा ले जाती हैं। इसके बाद गाड़ी के मालिक को भटकते हुए दो किलोमीटर दूर जाकर गाड़ी छुड़ानी पड़ती है, वह भी 100 या 200 रुपए का जुर्माना देकर। मरीजों की मजबूरी का यहां जमकर फायदा उठाया जाता है और उनकी परेशानियों को सुनने वाला कोई नहीं है। हालांकि यहां के सुरक्षा गार्ड पैसे लेकर इधर-उधर गाड़ियां लगवा देते हैं।

एम्स में 2012-13 में कई करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से तीन मंजिला भूमिगत पार्किंग बनाई गई थी। इसमें गाड़ियां खड़ी करने की जगह तो काफी है, लेकिन अस्पताल के मुख्य परिसर से डेढ़-दो किलोमीटर दूर होने के कारण दूरदराज से आने वाले मरीजों के लिए यह समस्या बन चुका है। परिसर में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना उनके लिए बेहद मुश्किल भरा होता है। वहीं एम्स की पार्किंग का फायदा साउथ एक्स के उन बड़े व्यापारियों को मिल रहा है जो यहां गाड़ियां खड़ी कर चले जाते हैं। एम्स की टो सेवा बिना स्टीकर की गाड़ियां उठाने में इतनी तत्परता दिखाती है कि उसे इस बात का भी एहसास नहीं होता कि उनकी गाड़ी से किसी मरीज को चोट पहुंच सकती है। और तो और यहां सरकारी स्टीकर लगी गाड़ियों को भी नहीं बख्शा जाता। वहीं एम्स परिसर के मुख्य गेट के पास 100 रुपए देने पर पार्किंग की सुविधा मिल जाती है, लेकिन फिलहाल यह सुविधा बंद है। इसके अलावा मदर डेयरी व नए कियोस्क के पास बनी पार्किंग के पास सुरक्षा गार्ड पैसे लेकर छोटी-बड़ी हर तरह की गाड़ी लगवा देते हैं।

इस मामले में प्रशासन की दलील है कि पार्किंग से मरीजों के लिए मुफ्त गाड़ियां चलाई जाती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यहां केवल आठ-दस गाड़ियां ही हैं जोकि व्यस्ततम घंटों में ही चलती हैं। बाकी समय में इक्का-दुक्का गाड़ियां ही नजर आती हैं। वही भी कहां रुकेंगी कहां नहीं,अनजान मरीजों को कुछ मालूम नहीं होता। लिहाजा लोगों को इसका फायदा कम ही होता है।

उत्तर प्रदेश से अपने पिता को कार्डियोलाजी विभाग में दिखाने आए विनीत ने कहा कि उनके पिता को घुटनों में दिक्कत है, जिससे उन्हें चलने में भी परेशानी होती है। पिता को पार्किंग से यहां तक आने में काफी मुश्किल हुई। वे इस जगह के लिए नए हैं इसलिए उनको कहीं अकेले खड़ा भी नहीं किया जा सका। इस बारे में जब निदेशक से बात करने की कोशिश की गई तो वे नहीं मिले और उनके सहयोगी कर्मचारियों ने इसके लिए सुरक्षा इंचार्ज या प्रशासनिक खंड में बात करने को कहा। प्रशासनिक खंड ने सुरक्षा इंचार्ज दीपक कुमार के दफ्तर जाने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया और दीपक कुमार के दफ्तर में कहा गया कि वे बैठक में व्यस्त हैं।

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