सोमवार को जारी विधान सभा चुनाव नतीजों के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी से गठबंधन के मुद्दे पर एआईएडीएमके के अंदर टूट का खतरा पैदा हो गया है। पार्टी में इस बात को लेकर गहरी खींचतान चल रही है कि टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय के साथ मिलकर सरकार बनाने का समर्थन किया जाए या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में इस बात से चिंतित है कि अगर कांग्रेस समर्थित टीवीके सरकार बनती है तो इसका राजनीतिक असर पूरे दक्षिण भारत में पड़ सकता है। खासकर केरल में कांग्रेस की वापसी के बाद बीजेपी नहीं चाहती कि तमिलनाडु में भी कांग्रेस मजबूत भूमिका में आए।
टीवीके को इस समय 108 सीटें मिली हैं और वह 118 के बहुमत से थोड़ा पीछे है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उसे गठबंधन की जरूरत है। इसी वजह से एआईएडीएमके पर दबाव बढ़ रहा है कि वह टीवीके के साथ जाए, ताकि कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों की भूमिका सरकार में कम हो सके।
एआईएडीएमके के अंदर इस मुद्दे पर भारी विवाद है। पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। एक और बैठक बुधवार को होने वाली है, जहां हालात और स्पष्ट हो सकते हैं।
वरिष्ठ नेता सी. वी. षणमुगम गठबंधन के पक्ष में, एस. पी. वेलुमणि विरोध में
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेता सी. वी. षणमुगम इस गठबंधन के पक्ष में हैं, लेकिन असली ताकत पूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि माने जा रहे हैं, जिनका पश्चिमी तमिलनाडु खासकर कोयंबटूर क्षेत्र में मजबूत प्रभाव है। उनके साथ कुछ अन्य विधायक जैसे सी. विजय भास्कर और विधायक कामराज (नन्निलम) भी बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार एआईएडीएमके की 47 विधायकों में से करीब 10 विधायक एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के साथ मजबूती से खड़े हैं, लेकिन बाकी में मतभेद बढ़ रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि जनता ने विजय को समर्थन दिया है, इसलिए टीवीके के साथ मिलकर सरकार में शामिल होना व्यावहारिक कदम होगा।
दूसरी ओर पार्टी में यह भी चर्चा है कि अगर एआईएडीएमके टीवीके के साथ जाती है तो उसे सरकार में उपमुख्यमंत्री और कुछ मंत्री पद मिल सकते हैं, लेकिन इससे एडप्पाडी के. पलानीस्वामी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है क्योंकि उन्हें एक नए नेता के नेतृत्व में काम करना पड़ेगा।
सूत्र बताते हैं कि अगर बुधवार की बैठक में सहमति नहीं बनी तो कुछ विधायक अलग रास्ता अपना सकते हैं और टीवीके के साथ खुलकर जा सकते हैं। इससे एआईएडीएमके में औपचारिक टूट भी संभव है। राजभवन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इंतजार कर रहा है कि टीवीके वास्तव में बहुमत साबित कर पाता है या नहीं। तमिलनाडु की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव ला सकता है और राज्य में सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
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तमिलनाडु में चुनाव परिणाम आने के बाद ही ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ शुरू हो गई है। सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे रह जाने के कारण सी. जोसेफ. विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने बहुमत जुटाने की कोशिशों के बीच अपने 108 नवनिर्वाचित विधायकों को महाबलीपुरम के चेंगलपट्टू स्थित एक होटल में ठहराया है। विधानसभा में बहुमत जुटाने के लिए टीवीके को 118 विधायकों की जरूरत है। नए चुने गए एमएलए को रिजॉर्ट में ठहराने का मकसद सभी को एकजुट रखना है क्योंकि टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
