किसान सबक सिखाना भी जानता है, भुलावे में न रहे कोई- कृषि कानून पर केंद्र के साथ रार के बीच बोले टिकैत

टिकैत ने शनिवार (24 जुलाई, 2021) को यह बात एक ट्वीट के जरिए कही।

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नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर किसान संसद को संबोधित करते बीकेयू के राकेश टिकैत। (फाइल फोटोः पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता और जाने-माने किसान नेता राकेश टिकैत ने कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के साथ जारी रार के बीच चेताया है कि अन्नदाता सबक सिखाना भी जानते हैं, इसलिए किसी को भुलावे में नहीं रहना चाहिए।

टिकैत ने शनिवार (24 जुलाई, 2021) को यह बात एक ट्वीट के जरिए कही। उन्होंने लिखा, “किसान संसद से किसानों ने गूंगी-बहरी सरकार को जगाने का काम किया है। किसान संसद चलाना भी जानता है और अनदेखी करने वालों को गांव में सबक सिखाना भी जानता है। भुलावे में कोई न रहे।”

बता दें कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन फिलहाल चल रहा है। अन्नदाताओं ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मध्य दिल्ली के जंतर मंतर पर गुरुवार को ‘किसान संसद’ का आगाज किया, जहां से संसद भवन कुछ ही दूर है और इन दिनों वहां मॉनसून सत्र चल रहा है।

किसानों के मुताबिक, इस किसान संसद का मकसद यह दिखाना है कि अपने 600 लोगों की जान गंवाने के बाद भी उनका आंदोलन अब भी जारी है। अपने-अपने यूनियनों के झंडे हाथों में थामे 200 किसानों के एक समूह ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते हुए विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी मांगी।

यह योजना बनाई गई कि 200 किसानों का समूह संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को संपन्न होने तक तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेगा। हालांकि, उप राज्यपाल अनिल बैजल ने वहां नौ अगस्त तक ही प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री व नयी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद मीनाक्षी लेखी ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं सहित अन्य स्थानों पर आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों को किसान कहने पर आपत्ति जताई और बृहस्पतिवार को कहा था कि ‘‘वह लोग मवाली हैं’’।

उधर, टिकैत ने सांसदों को एक सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसान जानते हैं कि उनके मुद्दों को संसद में नहीं उठाने वालों की आवाज कैसे दबानी है और सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘‘किसान जानते हैं कि संसद कैसे चलानी है। जो लोग संसद में बैठे हैं-चाहे वे विपक्षी नेता हों या सरकार के लोग हों, यदि वे हमारे मुद्दे नहीं उठाते हैं तो हम उनके निर्वाचन क्षेत्र में अपनी आवाज उठाएंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह दुनिया की पहली संसद है जो अवरोधकों के अंदर चल रही है और जिसे किसानों ने शुरू किया है। किसान संसद, संसद का सत्र जारी रहने तक चलेगी और आप (सरकार) को हमारी मांगें माननी पड़ेगी।’’ टिकैत ने कहा कि वे तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करेंगे। (भाषा-पीटीआई इनपुट्स के साथ)

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