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अफजल गुरु विवाद: कन्हैया समेत पांच छात्रों को जेएनयू से निकालने की सिफारिश

जेएनयू ने अफजल गुरु की फांसी के विरोध में परिसर में हुए विवादित कार्यक्रम के संबंध में छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित आठ छात्रों का शैक्षणिक निलंबन 11 मार्च को वापस लिया था।

Author नई दिल्ली | March 15, 2016 11:26 am
कन्‍हैया कुमार ने जेल से रिहा होने के बाद जेएनयू में छात्रों के सामने भाषण दिया था।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की एक उच्चस्तरीय समिति ने छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और दो अन्य छात्रों को निकालने की सिफारिश की है। इन लोगों पर विश्वविद्यालय में नौ फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारेबाजी का आरोप है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को इन छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सिफारिशों पर फैसला आरोपी छात्रों के जवाब मिलने के बाद किया जाएगा।

हालांकि सूत्रों ने कहा कि समिति की सिफारिश पर फैसला सुझावों पर पूरी जांच के बाद कुलपति एम जगदीश कुमार और मुख्य प्रॉक्टर ए डिमरी की ओर से किया जाएगा। कुलपति की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों की बैठक में सोमवार को इस रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने कन्हैया और उमर सहित 21 छात्रों को कारण बताओ नोटिस भेजे। ये छात्र विश्वविद्यालय नियम और अनुशासन के उल्लंघन के दोषी पाए गए थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम की जांच के लिए 10 फरवरी को उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने 12 फरवरी को अपनी शुरुआती रिपोर्ट दी थी। इसके बाद कन्हैया समेत आठ छात्रों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा, ‘उच्चस्तरीय समिति ने एक महीने से अधिक समय की जांच के बाद पांच छात्रों को निकालने की सिफारिश की है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला कुलपति और प्राक्टर कार्यालय की ओर से किया जाएगा।’

विश्वविद्यालय ने पांच सदस्यीय समिति की जांच पूरी होने पर 11 मार्च को कन्हैया सहित आठ छात्रों का शैक्षणिक निलंबन वापस ले लिया था। सूत्रों ने कहा कि कारण बताओ नोटिस जिन छात्रों को जारी किया गया है, उनमें वे आठ छात्र भी शामिल हैं, जिन्हें पहले इस मामले को लेकर निलंबित किया गया था और 10 छात्र वे हैं जिनके बारे में पुलिस ने विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी थी। कन्हैया के अलावा आठ निलंबित छात्रों में उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य, आशुतोष, रामा नगा, अनंत कुमार, श्वेता राज और ऐश्वर्या अधिकारी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा, ‘इस तरह के मामलों में कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय नियमों में मानक प्रावधान हैं। उच्चस्तरीय जांच समिति की सिफारिशें जेएनयू अनुशासन और उचित आचरण के नियमों पर आधारित हैं।’ उन्होंने कहा, ‘छात्रों के जवाब के आधार पर इस संबंध में अंतिम फैसला किया जाएगा।’

विश्वविद्यालय परिसर में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के विरोध में नौ फरवरी को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाए गए थे। पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद महेश गिरि की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार को 12 फरवरी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने बाद में पुलिस के सामने आत्मसर्मपण कर दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने कन्हैया कुमार को दो मार्च को छह महीने के लिए अंतरिम जमानत दे दी थी। इसके बाद वो तीन मार्च को रिहा हो गए। जबकि उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

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