कोरा ही रहा किसानों को कर्ज माफी का वादा- After Won UP Assembly Polls Yogi's GOVT. Politicians Forget farmer's debt promise - Jansatta
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कोरा ही रहा किसानों को कर्ज माफी का वादा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बुधवार को मेरठ में दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य के किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया है।

Author नई दिल्ली | June 2, 2017 1:18 AM
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बुधवार को मेरठ में दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य के किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया है। लेकिन ग्रामीण इलाकों के कई बैंक मैनेजरोें ने जनसत्ता की पड़ताल में इस दावे को झूठ बताया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बुधवार को मेरठ में दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य के किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया है। लेकिन ग्रामीण इलाकों के कई बैंक मैनेजरोें ने जनसत्ता की पड़ताल में इस दावे को झूठ बताया। किसानों ने भी शिकायत की है कि अभी तक उन्हें कर्जमाफी के सरकारी फैसले का कोई लाभ नहीं मिल पाया है। अलबत्ता सहकारी समितियों द्वारा कर्ज वसूली के नोटिस उन्हें जरूर मिल रहे हैं। भाजपा ने चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था। खुद अमित शाह ने कहा था कि सरकार बनी तो पहला फैसला किसानों की कर्ज माफी का होगा। सरकार बने 70 दिन बीत गए पर बैंकों को अभी तक भी कर्जमाफी का कोई आदेश सरकार की तरफ से नहीं मिल पाया है। सिंडीकेट बैंक बागपत जिले का लीड बैंक है। डौला गांव स्थित इस बैंक की शाखा के प्रबंधक का कहना था कि सरकार ने उनसे 31 मार्च 2016 की तारीख को बैंक के कर्जदार किसानों का आंकड़ा तो जरूर मांगा था पर कर्जमाफी के बारे में अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है।

किसान नेता वीएम सिंह ने इस मामले में राज्य की भाजपा सरकार पर किसानों के साथ छल-कपट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले किसानों का भाजपा ने कोई वर्गीकरण नहीं किया था। पर सरकार बनते ही उसके सुर बदल गए। केवल छोटे और सीमांत किसानों को ही कर्जमाफी का लाभ देने की उसने नई शर्त जोड़ दी। वह भी महज एक लाख रुपए तक की अधिकतम सीमा के साथ। वीएम सिंह को हैरानी है कि यह वादा भी योगी सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया। इस बीच कर्जमाफी के इस फैसले में कई दांवपेच भी लगाए जा रहे हैं। मसलन, चर्चा है कि एक लाख रुपए तक का कर्ज केवल उन्हीं किसानों का माफ किया जाएगा जो डिफाल्टर हैं। यानी जिन्होंने 31 मार्च, 2016 से पहले कर्ज ले रखा हो पर वापस न किया हो। ईमानदारी से वक्त पर कर्ज वापस करने वाले किसान भाजपा सरकार की नजर में किसी राहत के हकदार नहीं हैं। इस मापदंड पर बैंकों को भी अचरज है। उनका तर्क है कि केवल डिफाल्टरों को लाभ देने से भविष्य में बैंकों के कर्ज की वसूली में अड़चन आएगी। ईमानदार किसान भी कर्ज वापस करने से कतराएंगे। किसानों की कर्जमाफी ही नहीं कानून व्यवस्था की हालत में सुधार नहीं होने से अब सूबे की आम जनता ही नहीं भाजपा के कार्यकर्ता भी पीड़ित दिख रहे हैं। बुधवार को केशव मौर्य ने मेरठ में पार्टी की एक समीक्षा बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं से जब सवाल किया कि अपराधियों में नई सरकार बनने के बाद खौफ पैदा हुआ या नहीं तो मौजूद लोगों ने एक सुर में कहा- नहीं। इनमें पार्टी के सांसद राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, संगीत सोम, सत्यवीर त्यागी, सोमेंद्र तोमर, दिनेश खटीक व महानगर भाजपा अध्यक्ष करुणेशनंदन गर्ग भी मौजूद थे। हैरान मौर्य ने यह कह कर पीछा छुड़ाया कि खौफ जल्द दिखेगा।

इसी बैठक में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ही नहीं पार्टी के सांसद व विधायकों ने भी नौकरशाही के नाकारा और हावी होने का रोना रोया। उन्हें दर्द है कि उनकी वाजिब शिकायत भी अपनी ही सरकार में कोई नहीं सुन रहा। भाजपा नेताओं ने मौर्य को बता दिया कि किसान केंद्र की यूपीए और दिल्ली की सरकार का उदाहरण देकर उनकी खिंचाई कर रहे हैं। यूपीए सरकार ने देशभर में किसानों का पचास हजार रुपए तक का कर्ज 2006-07 में माफ किया था। घोषणा के एक महीने के भीतर किसानों को इसका फायदा मिल गया था। इसी तरह केजरीवाल ने पानी के बिल की माफी और बिजली बिल आधे करने के अपने फैसले को सत्ता संभालते ही अमली जामा पहना दिया था।

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