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यूपीः गुर्जरों ने दलित युवकों की पिटाई कर नोचा नाखून, गांव छोड़ गए बागपत के दलित

गुर्जर समुदाय के लोगों ने बागपत के दो दलित किशोरों पर हमला किया तो 48 घंटे के भीतर कमला गांव के एक तिहाई दलितों ने घर ही छोड़ दिया।वहीं लड़कियों को एहतियातन दूसरे गांवों के रिश्तेदारों के पास भेज दिया गया।

Author नई दिल्ली | May 6, 2018 5:59 PM
पिटाई से डरे कमला गांव के एक तिहाई दलितों ने छोड़े घर(Express photo by Gajendra Yadav)

गुर्जर समुदाय के लोगों ने बागपत के दो दलित किशोरों पर हमला किया तो 48 घंटे के भीतर कमला गांव के एक तिहाई दलितों ने घर ही छोड़ दिया।वहीं लड़कियों को एहतियातन दूसरे गांवों के रिश्तेदारों के पास भेज दिया गया। पिटाई में घायल 19 वर्षीय बीए स्टूडेंट आकाश खोंडवाल मेरठ क्रिटिकल केयर हास्पिटल में वेंटीलेटर पर है। चिकित्सकों ने बताया कि पैर में फ्रैक्चर के अलावा किडनी भी क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं उसके नाखून भी बाहर निकाल लिए गए थे। दूसरा पीड़ित आकाश का भतीजा मनीष है। दलितों का आरोप है कि प्रधान प्रमोद राणा के कहने पर हमला हुआ। 5100 की जनसंख्या वाले गांव में महज सौ दलित हैं। हालांकि प्रधान और पुलिस ने पंचायत में हमले की योजना से इन्कार किया है।

पुलिस ने दावा किया कि सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामला शांत है। राजवीर, राजपाल, रामेश्वर, पप्पू, बिरेंद्र और राज सिंह को केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ हत्या के प्रयास, जान बूझककर चोट पहुंचाना, घातक हथियार का प्रयोग से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया।
पुलिस का कहना है कि 20 वर्षीय दलित युवक की 18 साल की लड़की से प्रेम संबंध के कारण यह घटना हुई। गांववालों का कहना है कि 15 अप्रैल को लड़की के घर वालों ने अपने समुदाय के लड़के से शादी की। मगर 27 अप्रैल को वह दलित युवक के साथ भाग गई। जिससे गुस्से में आकर गुर्जर समुदाय के लोगों ने लड़की के रिश्तेदार दलित युवकों की पिटाई कर दी। पुलिस के मुताबिक, 28 अप्रैल को 18 वर्षीय लड़की का माता-पिता ने पता लगा लिया और उसे घर ले आए, मगर दलित लड़का अपने घर नहीं पहुंचा।

एक्सप्रेस से बातचीत में मनीष ने बताया-उन्होंने मुझे और आकाश को किडनैप किया और किसी स्थान पर ले गए। लोहे की रॉड से मेरी पिटाई की। मैने उनसे पिटाई न करने की गुहार लगाई मगर उन्होंने कहा कि हम तुम्हारी समुदाय को पाठ पढ़ाना चाहते हैं। अपनी शिकायत में आकाश के पिता धनपाल ने कहा है कि 28 अप्रैल को गांव के पास छोड़ने से पहले बेटे को कैद कर रखा गया था और उसे बहुत यातना दी गई। गांव में 43 दलित घर हैं। जिसमें से 13 घरों के दलित पलायन कर गए हैं। ग्राम प्रधान ने दलितों को किसी बात से भयभीत होने की बात को बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने बताया कि यह सब मीडिया का पैदा मसाला है।

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