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दिल्ली मेरी दिल्ली: कांग्रेस बेहाल, बड़ा दिल, महंगे शौचालय और खुली पोल

शीला दीक्षित समर्थक तो यह भी कहने से नहीं चूके कि उनकी मौत पार्टी के विवाद के तनाव से हुई। वैसे वे काफी समय से बीमार थीं और मुख्यमंत्री रहते हुआ ही उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी।

कांग्रेस पार्टी का झंडा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

-बेदिल

कांग्रेस बेहाल

दिल्ली की 15 साल मुख्यमंत्री और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष रहीं शीला दीक्षित के निधन के बाद दिल्ली कांग्रेस बुरे हाल में पहुंच गई है। गुटबाजी का आलम यह है कि शीला दीक्षित विरोधी खेमे के नेताओं को पिछले शनिवार को दीक्षित के निधन की सूचना मिलने के बावजूद के उस दिन अंतिम दर्शन की हिम्मत नहीं जुटा पाए। सुना गया कि दीक्षित समर्थक एक नेता निधन के मौके पर ही विरोधियों को बुरा-भला कह रहे थे। निधन के मौके पर कोई और अप्रिय विवाद न होने के डर से सभी विरोधी दूसरे दिन शीला दीक्षित के अंतिम दर्शन कर पाए। दोनों गुट एक दूसरे पर भाजपा के हाथों खेलने का आरोप लगा रहे थे। शीला दीक्षित समर्थक तो यह भी कहने से नहीं चूके कि उनकी मौत पार्टी के विवाद के तनाव से हुई। वैसे वे काफी समय से बीमार थीं और मुख्यमंत्री रहते हुआ ही उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। इतना ही नहीं तबीयत पूरी तरह से ठीक न होने से उनका फ्रांस में भी इलाज हुआ। यह जरूर था कि इस उम्र में जिस तरह उनकी पार्टी के लिए उपयोगिता थी, वह नहीं की गई।

बड़ा दिल
शीला दीक्षित के निधन के दिन ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के एक जत्थे के साथ वैष्णों देवी की यात्रा पर जाना था। उन्होंने जाना रद्द किया और अपने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ शीला दीक्षित के अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए। दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। वास्तव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस के वोटों के बूते ही दिल्ली की सरकार में आई और कहा जा रहा था कि लोकसभा चुनाव में जिस तरह से एक वर्ग उससे अलग होकर वापस कांग्रेस के साथ आया, अगर शीला दीक्षित स्वस्थ्य रह कर काम करती तो संभव था कि अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास वापस उसके और वोटर लौटते। दिल्ली में एक वर्ग ऐसा है जो यह मानता है कि शीला दीक्षित ने विपरित माहौल में दिल्ली को बेहतर करने का काम किया।

समय से आगे!
दिल्ली में मतदान संपन्न हुए ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन सड़कों पर दौड़ते हुए दिल्ली परिवहन बेड़े की बसें आज भी 12 मई को मतदान जरूर करें की अपील करती नजर आ रही हैं। बीते दिनों केंद्रीय सचिवालय स्थित बस स्टॉप पर खड़े होकर बस की बाट जोह रहे लोगों के बीच जब एक व्यक्ति की नजर बस के डिसप्ले बोर्ड पर पड़ी तो उससे सहसा निकल पड़ी आवाज से कई लोग चौंक गए। दरअसल, बस वोट देने की अपील के साथ तारीख भी बता रही थी। किसी ने कहा-अच्छे दिन है। सरकार व महकमा चुस्त है! मौके पर मौजूद एक अन्य अधेड़ ने बात को आगे बढ़ाया। कहा- कौन कहता है डीटीसी की बसें तेज नहीं चलती वो तो समय से आगे चलती है। तभी तो 12 मई को आज भी दर्शा रही है। है न, समय से आगे!

खुली पोल
दिल्ली सरकार दावा करती है कि बारिश से पहले नालों और नालियों की सफाई कर ली गई है। पर हर बार बारिश के दिनों में दिल्ली जलमग्न हो जाती है और उन सभी विभागों के दावों की पोल खुल जाती है, जो प्रतिवर्ष दावा करते हैं कि इस बार दिल्लीवासियों को जलभराव से दो-चार होना नहीं पड़ेगा। इस बार भी दिल्ली के कई क्षेत्रों में अंडरपास में पानी भर गया और लोगों को अंडरपास पार करने के लिए ट्रैक्टर और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) के संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई तो विभाग के अधिकारी अपनी गलती मामने की बजाय दूसरे विभाग पर ठीकरा फोड़ते नजर आए। उससे भी हैरान करने वाली बात यह थी कि अधिकारी यह मामने को तैयार ही नहीं थे कि उनके विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है। बहरहाल दिल्ली बारिश के बाद जलमग्न हो जाती है और दावों की पोल खुलती है। बावजूद इसके विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर दोष मढ़ कर अपनी नाकामियों को छुपाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

महंगे शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर नोएडा की व्यस्त सड़कों पर बनाए निशुल्क सार्वजनिक शौचालय अब इनका इस्तेमाल करने वालों के लिए बहुत महंगे साबित हो रहे हैं। इसकी वजह यातायात पुलिस का अभियान है। पिछले कुछ दिनों में शौचालयों का इस्तेमाल करने वाले दर्जनों वाहन चालकों के चालान केवल इस वजह से काट दिए गए हैं कि उन्होंने अपनी गाड़ी सड़क पर खड़ी की थी। दीगर है कि शहर में जहां भी इन शौचालयों को बनाया गया है, वे सभी व्यस्त मार्ग हैं। शौचालयों के आसपास काफी दूर तक कहीं भी ऐसी जगह नहीं हैं, जहां पर कुछ देर के लिए वाहन खड़ा किया जा सके। लिहाजा शौचालय का इस्तेमाल कर चंद ही मिनट में बाहर आने पर वाहन चालक को पता चलता है कि उसकी नो पार्किंग में खड़ी करने के चलते जब्त की जा रही है। गाड़ी छुड़ाने के लिए चालान भरवाया जा रहा है। दलील देने के बावजूद यातायात पुलिस कर्मी विभाग के लक्ष्य की प्रतिपूर्ति की बात कहकर कुछ सुनने को तैयार नहीं है।

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