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रिटायर होते ही गांव लौट गए थे जस्टिस चेलामेश्‍वर, जानिए क्‍या है जस्टिस कुरियन जोसेफ का प्‍लान

चेलामेश्वर की योजना सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी असाइनमेंट लेने की नहीं है, मगर उनका इरादा केरल शिफ्ट होने का भी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में रिटायर हुए जस्टिस कुरियन जोसेफ। (एक्सप्रेस फोटो)

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में रिटायर हुए जस्टिस कुरियन जोसेफ अपने पूर्ववर्ती जस्टिस जे चेलामेश्वर के नक्शे कदम पर नहीं चलेंगे। चेलामेश्वर ने पद से रिटायर होते ही राष्ट्रीय राजधानी छोड़ दी और अगले ही दिन अपने गांव लौट गए। इंडियन एक्सप्रेस के दिल्ली कॉन्फिडेंटल में छपी खबर के मुताबिक हालांकि चेलामेश्वर की योजना सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी असाइनमेंट लेने की नहीं है, मगर उनका इरादा केरल शिफ्ट होने का भी नहीं है। संभव है कि जस्टिस जोसेफ इस महीने के आखिर तक वसंत विहार स्थित एक किराए के मकान में शिफ्ट हो जाएं। बता दें कि रिटारमेंट के एक दिन बाद यानी बीते शुक्रवार को जस्टिस जोसेफ ने अपने एक बयान से सबको चौंका दिया था। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि उन्हें 12 जनवरी के विवादित संवाददाता सम्मेलन को लेकर कोई पछतावा नहीं है जिसमें उन्होंने और तीन अन्य जज ने सुप्रीम कोर्ट के कामकाज को लेकर विभिन्न मुद्दे उठाए थे।

जोसेफ ने कहा कि अब चीजें बदल रही हैं। शीर्ष अदालत की व्यवस्थाओं और परंपराओं में बदलाव आने में समय लगेगा क्योंकि वे लंबे वक्त से मौजूद हैं। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकूर और पूर्व न्यायाधीश जे चेलामेश्वर के साथ मिलकर एक संवाददाता सम्मेलन किया था जिसमें शीर्ष अदालत में मामलों के आवंटन सहित गंभीर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश द्वारा न्यायिक शक्तियों के इस्तेमाल पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं होता। जिस तरह से नियुक्तियों में चुनिंदा तरीके से देरी की जा रही है या इन्हें रोककर रखा जा रहा है वह एक तरीके से न्याय में हस्तक्षेप है।

गौरतलब है कि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या 12 जनवरी के सम्मेलन का हिस्सा होने पर उन्हें कोई पछतावा है? इसपर उन्होंने जवाब दिया, ‘आप किस तरह का अजीब सवाल पूछ रहे हैं? मैंने जो कुछ किया मुझे उसका कोई पछतावा नहीं है, मैंने बहुत सोच समझकर एक उद्देश्य से ऐसा किया, ऐसा उद्देश्य जिसके लिए कोई और रास्ता नहीं बचा था। जब हमने ऐसा किया तब यही स्थिति थी। जहां तक शीर्ष अदालत की बात है तो उच्चतर न्यायपालिका में नियुक्तियों और स्थानान्तरण से जुड़े ‘मैमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (एमओपी) अंतिम रूप में है और कॉलेजियम मसौदे के अनुसार काम कर रहा है।

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