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Lumpy Virus Alert: राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु में लंपी वायरस की दहशत, गायों को वायरस से बचाने के लिए हो रहा हवन

Lumpy Virus: उत्तर भारत में कहर मचाने के बाद लंपी वायरस अब दक्षिण भारत के तमिलनाड पहुंच चुका है, कोयंबटूर जिले में लोगों ने मंदिर में हवन-पूजन शुरू कर दिया है।

Lumpy Virus Alert: राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु में लंपी वायरस की दहशत, गायों को वायरस से बचाने के लिए हो रहा हवन
Tamilnadu Worship For Save Cows: तमिलनाडु में गायों को बचाने के लिए हवन (Photo- YouTube Video Grab)

Tamilnadu Lumpy Virus: कोरोना संक्रमण के बाद दुनिया भर में कई तरह की नई बीमारियों ने हमला बोला है। इस बीच भारत के कई प्रदेशों में जानवरों में फैल रही एक नई बीमारी ने लोगों का ध्यान खींचा है। लंपी वायरस नाम की नई बीमारी ने मवेशियों पर हमला बोला है। यह बीमारी एक वायरल बीमारी है और पॉक्स वायरस से पशुओं में संक्रमित होती है। मच्छर काटने, मक्खियों के काटने से ये बीमारी एक से दूसरे पशुओं में फैल रही है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात राज्यों में इस बीमारी ने कहर मचा दिया है। अब ये बीमारी दक्षिण भारत के तमिलनाडु भी पहुंच चुकी है।

उत्तर भारत में लंपी वायरस की दहशत अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि ये बीमारी दक्षिण भारत भी जा पहुंची है। तमिलनाडु में दस्तक दे रही लंपी वायरस बीमारी से बचने के लिए वहां के स्थानीय लोग हवन पूजन और यज्ञ भी करवा रहे हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में इस बीमारी से बचने के लिए लोगों ने मंदिर में हवन-पूजन शुरू कर दिया है।

Rajasthan के कई जिलों में लंपी बीमारी का प्रकोप

लंपी वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य राजस्थान रहा है। राजस्थान के जालौर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में लंपी स्किन डिजीज की बीमार का सबे ज्यादा प्रकोप देखा गया है। प्रदेश में लगभग 1500 से भी ज्यादा मवेशियों की जान लंपी वायरस की बीमारी से जा चुकी है। सबसे पहले ये पाकिस्तानी सीमारेखा से सटे राजस्थान के हिस्से में आई थी।

जानिए क्या है Lumpy Skin Disease के लक्षण

लंपी स्किन डिजीज की बीमारी एक वायरल बीमारी है ये जानवरों में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। जो मेवशी लंपी वायरस से संक्रमित होते हैं उनमें बुखार शरीर में गांठ, पूरे शरीर में छाले और मुंह से लागातार लार गिरने लगती है। इस बीमारी वाले मवेशियों के आंख-नाक से भी पानी गिरने लगता है। पशु चिकित्सकों ने बताया इस रोग के बाद पशुओं के दूध में कमी हो जाती है। इस बीमारी से पशुओं में गर्भपात का खतरा, बांझपन की स्थिति बढ़ने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

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