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राजस्थान के किसान भी आंदोलन की तैयारी में

मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन के बाद अब राजस्थान के किसान संगठन भी आंदोलन की तैयारी में लग गए है। भारतीय किसान संघ ने 15 जून से मांगों को लेकर सभी संभाग मुख्यालयों पर बेमियादी महापड़ाव डालने का फैसला किया है।

Author नई दिल्ली | June 9, 2017 2:07 AM
प्रदेश किसान महापंचायत ने भी किसानों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का एलान किया है।

मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन के बाद अब राजस्थान के किसान संगठन भी आंदोलन की तैयारी में लग गए है। भारतीय किसान संघ ने 15 जून से मांगों को लेकर सभी संभाग मुख्यालयों पर बेमियादी महापड़ाव डालने का फैसला किया है। प्रदेश किसान महापंचायत ने भी किसानों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का एलान किया है। दूसरी तरफ पुलिस के खुफिया तंत्र ने भी मध्य प्रदेश की सीमा से सटे इलाकों में किसानों के आंदोलन शुरू होने की सूचना सरकार तक पहुंचाई है। प्रदेश के किसानों के संभावित आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का हिमाचल प्रदेश का दौरा निरस्त कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश के किसानों का आंदोलन उग्र होने के बाद राजस्थान सरकार ने भी सीमावर्ती जिलों में प्रशासन और पुलिस को सतर्क रहने का आदेश दिया है। भारतीय किसान संघ ने किसानों की समस्याओं को लेकर 15 जून को संभाग मुख्यालयों पर सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकाल महापड़ाव डालने का एलान किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं माने तक महापड़ाव जारी रहेगा। संघ के चित्तौड़ इलाके के महामंत्री प्रवीण सिंह का कहना है कि संगठन के जयपुर में हुए अधिवेशन में ही फैसला हो गया था कि किसानों की समस्याओं को लेकर 15 जून को आक्रोश रैली निकाली जाएगी।

सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है और उसे अब आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार के धीमी गति से काम करने और मुआवजा देने में देरी से किसान खासे नाराज हैं। किसानों की मांग है कि समस्याओं को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और किसानों के लिए बिजली सस्ती की जाए। लाभकारी मूल्य पर उपज खरीद हो और सिंचाई के माकूल इंतजाम किए जाए। प्रदेश किसान महापंचायत ने तो आंदोलन की शुरुआत कर दी है। महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल जाट ने मध्य प्रदेश के किसानों का समर्थन करते हुए मंदसौर में मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात की। जाट ने बताया कि मांगों को लेकर ग्राम स्तर पर किसान प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों को ज्ञापन देकर सरकार को चेताने का काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी जिलों में किसानों की रैलियां आयोजित कर सरकार से मांगें मनवाने का प्रयास किया जाएगा।

उनका कहना है कि किसानों को उपज का पूरा दाम मिले। समर्थन मूल्य पर पंचायत स्तर पर वर्ष भर खरीद की जाए। इन मांगों को लेकर किसान महापंचायत पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। किसानों के आंदोलन की गरमाहट देख सरकार भी सजग हो गई है। सरकार के आपदा राहत विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि पिछले फसल खराब होने का मुआवजा किसानों को फौरन दिया जाए। इसके साथ ही उर्जा विभाग इस कसरत में जुट गया है कि खेती के लिए बिजली की दरें किस तरह से कम की जा सकती है। किसानों को राहत देने के लिए सरकार कुछ कदम उठाने की तैयारी में है। इसमें फसली कर्ज पर सरकार ब्याज माफी करने के मूड में है।

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