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पति की मौत के बाद कैब ड्राइवर बन परिवार की जिम्मेदारी उठा रहीं पिंकी

आज महिला दिवस है, महिलाओं का सम्मान और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन। हमारे देश में कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत और आत्मबल के दम पर खुद को साबित किया है, लेकिन जरूरी नहीं कि जिंदगी से जंग लड़ती ऐसी सभी महिलाओं की कहानी आपके सामने आए।

Author नई दिल्ली | Published on: March 8, 2016 4:06 AM
अपनी कैब केे साथ खड़ीं पिंकी रानी शर्मा

आज महिला दिवस है, महिलाओं का सम्मान और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन। हमारे देश में कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत और आत्मबल के दम पर खुद को साबित किया है, लेकिन जरूरी नहीं कि जिंदगी से जंग लड़ती ऐसी सभी महिलाओं की कहानी आपके सामने आए। कुछ कहानियां अनकही और अनसुनी भी रह जाती हैं। ऐसी ही कहानी है 42 साल की पिंकी रानी शर्मा की, जिन्होंने दुश्वारियों की जिंदगी से निकलकर अपने परिवार को संभाला। पिंकी ओला कैब चलाती हैं और अपने दम पर बच्चों की परवरिश कर रही हैं। हालांकि, महिलाओं की कैब ड्राइविंग अब अजूबा नहीं, लेकिन जिंदगी के चालीस बसंत घर-परिवार की छांव में गुजारने वाली पिंकी के लिए अकेले बाहर निकलना आसान नहीं था। पति की बीमारी के दौरान पिंकी ने परिवार की सारी जिम्मेदारी उठाई और अब उनकी मौत के बाद भी वह बिना किसी मदद के सिर उठा के फक्र से जी रही हैं।

दो साल पहले पिंकी के पति की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई, लेकिन शोक मनाने के बजाए पिंकी अपने तीन बच्चों परवरिश में लग गई। पति के रहते पिंकी ने कभी कमाई के लिए घर की दहलीज तक नहीं लांघी थी, लेकिन पति की मौत के बाद कैसे भी करके उन्हें अपना और अपने बच्चों का पेट पालना थाष ऐसे में उसे जो रास्ता दिखा वह था कैब ड्राइविंग का। पिंकी कहती हैं, ‘मेरे पास अपनी गाड़ी थी, ड्राइविंग लाइसेंस था, गाड़ी चलाने का शौक था, मैंने पिक एंड ड्रॉप का काम शुरू कर दिया, लेकिन कमर्शियल लाइसेंस नहीं था। कई जगह अपना बायोडाटा लेकर गई, लेकिन हर जगह कमर्शियल लाइसेंस मांगते थे।’ फिर पिंकी ने टैक्सी स्टैंड पर काम करना शुरू कर दिया।

ओला कैब के साथ पिंकी की कहानी लगभग एक साल पहले शुरू हुई। आज पिंकी दिल्ली-एनसीआर में बेखौफ होकर कैब चलाती हैं। पिंकी की दिनचर्या सुबह 6-7 बजे से शुरू होकर शाम को 6-7 बजे तक चलती है। वह छुट्टी भी नहीं करतीं, क्योंकि रोजाना लगभग 1500 से 2000 रुपए कमाने का लक्ष्य है। पिंकी कहती हैं कि वह अकेले कमाने वाली हैं, बच्चे अभी पढ़ रहे हैं, दो बेटे नवीं और पांचवी में हैं और एक बेटी आठवीं में। मांग के मुताबिक वह देर रात तक भी ड्राइविंग करती हैं। ड्राइविंग के दौरान अभी तक कोई परेशानी नहीं आई, अगर कभी कोई कुछ कहता भी है तो वह अनसुना कर देती हैं। एक महिला होने के नाते पुरुष वर्चस्व वाले पेशे में दक्षता के सवाल पर पिंकी कहती हैं कि वह खुद को किसी से कम नहीं पातीं, कई पुरुष ड्राइवर रास्ते जानने के लिए अक्सर उन्हें फोन करते हैं।

यूं तो पिंकी संयुक्त परिवार में रहती हैं, सभी संपन्न हैं, लेकिन मदद की बात करें तो उनका होना, न होना बराबर है। मूल रूप से हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली पिंकी की परवरिश दिल्ली में हुई। वह अपने बीमार पति को तो नहीं बचा पार्इं, लेकिन पति की बीमारी के साथ-साथ उन्होंने जिंदगी से लड़ना भी सीख लिया। पिंकी कहती है, ‘हम क्यों रोएं कि हमारा कोई नहीं है, क्यों न चुनौतियों का सामना साहस के साथ करें।’ वाकई में पिंकी ऐसी कई महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो जीवन की डगर में अकेली पड़ जाती हैं, उनके पास आजीविका का साधन भी नहीं होता, लेकिन अपनी आत्म शक्ति को पहचान कर खुद को कभी भी निखारा जा सकता है और जीने का रास्ता बनाया जा सकता है।

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